लिखना था ब्राज़ील, गलती से लिख बैठे भारत…! ट्रंप करने चले थे अमेरिकी चुनाव की आलोचना, खुद हो गए ट्रोल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राज़ील में हो रहे चुनाव को भारत का समझ बैठे और सोशल मीडिया पर ग़लत पोस्ट कर दिया. इसके बाद ना सिर्फ उन पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि उनकी हेल्थ को लेकर भी अटकलें लगने लगे हैं.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर 'गलती से मिस्टेक कर दी है.' उन्होंने ब्राज़ील को इंडिया समझकर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसके बाद सवाल उनके स्वास्थ्य को लेकर उठने लगे हैं. आपको बता दें कि ट्रंप ने भी ब्राजीली चुनाव को लेकर ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया, लेकिन ब्राज़ील की जगह भारत लिख बैठे. शायद वो भूल गए कि आम चुनाव भारत में नहीं, ब्राज़ील में हो रहे हैं. और तो और भारत में भी राष्ट्रपति का सीधा चुनाव नहीं होता है और जनता सीधे वोटिंग में हिस्सा नहीं लेती है. हालांकि कई सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप के इस पोस्ट को फेक होने का भी दावा किया जा रहा है. इसकी सत्यता की पुष्टि की जानी बाकी है कि ट्रंप ने सच में ये पोस्ट किया था.
ब्राजील चुनाव की जगह भारत लिख कर ट्रोल हो गए ट्रंप!
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "आज भारत के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 12.5 करोड़ लोगों ने वोट दिया. वोटिंग खत्म होने के कुछ ही देर बाद, उसी दिन नतीजे भी आ गए! डेट्रॉइट, फिलाडेल्फिया, कैलिफ़ोर्निया और अमेरिका के कई अन्य शहरों और राज्यों में, जहां वोटिंग की संख्या बहुत कम होती है, वहां नतीजों की गिनती करने में अक्सर हफ़्तों लग जाते हैं, मेरा मतलब है, नतीजों में हेर-फेर करने में...अमेरिका में वोटिंग में धांधली होती है!!!
ब्राजील में हो रहा है राष्ट्रपति चुनाव
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 98.81 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक बोल्सोनारो को 47.24 प्रतिशत वोट मिले, जबकि लूला को 44.91 प्रतिशत वोट हासिल हुए. पहले दौर में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से आगे रहे. हालांकि, वह सीधे जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत वोट हासिल नहीं कर सके. अब दोनों उम्मीदवारों के बीच 25 अक्टूबर को दूसरे दौर का मुकाबला होगा.
ब्राजील की चुनाव व्यवस्था के मुताबिक, पहले दौर में जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल करना जरूरी है. दोनों में से कोई भी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका, इसलिए अब दोनों दूसरे दौर में आमने-सामने होंगे.
पहला दौर फ्लावियो बोल्सोनारो के लिए मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है. वह ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं. पूर्व दक्षिणपंथी नेता जायर बोल्सोनारो पिछले चुनाव के नतीजे को सैन्य तख्तापलट के जरिए पलटने की नाकाम कोशिश की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 27 साल की जेल की सजा काट रहे हैं.
पूर्व राष्ट्रपि जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो पहले दौर में रहे आगे!
पहले दौर का मुकाबला शुरू से ही करीबी रहने की उम्मीद थी. हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान ओपिनियन पोल में लूला मामूली बढ़त बनाए हुए थे. इसके बावजूद फ्लावियो बोल्सोनारो का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा और इससे दूसरे दौर से पहले ब्राजील की राजनीतिक तस्वीर काफी बदल गई है.
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पहले दौर के नतीजे बोल्सोनारो के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकते हैं, क्योंकि दूसरे दौर में जगह नहीं बना पाने वाले कई उम्मीदवार दक्षिणपंथी खेमे से थे. अगर बोल्सोनारो इन उम्मीदवारों के समर्थकों का वोट अपने पक्ष में लाने में कामयाब रहते हैं, तो 25 अक्टूबर के मुकाबले में यह अहम साबित हो सकता है.
वहीं, लूला अब अपने मौजूदा वोटरों का समर्थन बनाए रखने के साथ-साथ उन लोगों को भी अपने पक्ष में लाने की कोशिश करेंगे, जिन्होंने पहले दौर में बाहर हो चुके उम्मीदवारों को वोट दिया था. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दक्षिणपंथी खेमे को ब्राजील की सत्ता में आने से रोकने की होगी.
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25 अक्टूबर को लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच होगा बड़ा मुकाबला!
ब्राजील के चुनाव पर पूरे लैटिन अमेरिका की नजर है. हाल के वर्षों में इस क्षेत्र के कई देशों में दक्षिणपंथी नेता राष्ट्रपति चुने गए हैं. इनमें से कई नेताओं के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ करीबी राजनीतिक रिश्ते हैं. यही वजह है कि ब्राजील में दूसरे दौर का चुनाव सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है.
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25 अक्टूबर को लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच होने वाला मुकाबला तय करेगा कि ब्राजील में वामपंथी नेतृत्व जारी रहेगा या लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में बढ़ते दक्षिणपंथी रुझान के बीच देश की सत्ता भी दक्षिणपंथ की ओर जाएगी.