जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

रूस के साथ अफगानिस्तान का सैन्य अभ्यास, पाकिस्तान के खिलाफ बन रही बड़ी रणनीति! भारत खुश

अफगानिस्तान सेना के कमांडर मौलवी नसीबुल्लाह के नेतृत्व में सेना ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया. सेना के एक दल ने रूस में सेना के कठिन युद्धाभ्यास को करीब से देख सैन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की.

Author
04 Oct 2026
( Updated: 04 Oct 2026
04:53 PM )
रूस के साथ अफगानिस्तान का सैन्य अभ्यास, पाकिस्तान के खिलाफ बन रही बड़ी रणनीति! भारत खुश
Image by Saifurahman Safi/Xinhua/IANS
Advertisement

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है. हाल ही में दोनों ने एक दूसरे के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए गए थे. अफगानिस्तान इस लड़ाई को अगले मोर्चे पर ले जाने की तैयारी कर रहा है. तालिबानी सरकार रूस के साथ मिलकर पाक के खिलाफ बड़े मोर्चे की तैयारी कर रही है. 

अफगानिस्तान की सेना रूस के बड़े रणनीतिक युद्ध अभ्यास 'सेंटर-2026' में शामिल हुई है. इस अभ्यास के जरिए तालिबान की आधुनिक सैन्य कौशल, उन्नत उपकरण और क्षेत्रीय सुरक्षा मंच तक पहुंच बढ़ेगी. मॉस्को से तालिबान की इस सैन्य नजदीकी से इस्लामाबाद की बेचैनी को बढ़ा दिया है. 

रूस की सेना तालिबान को सीखा रही युद्ध के दांव-पेंच 

रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान सेना के कमांडर मौलवी नसीबुल्लाह के नेतृत्व में सेना ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया. सेना के एक दल ने रूस में सेना के कठिन युद्धाभ्यास को करीब से देख सैन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की. दोनों के बीच युद्ध, सैन्य बल और अभ्यास को लेकर लंबी बातचीत भी हुई. इस अभ्यास में कई देशों के सैन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे. इनमें भारत के साथ चीन, उत्तर कोरिया, वियतनाम, कोलंबिया, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान हैं. रूस में एक ही मंच पर कई देशों के सैन्य अनुभवों ने काबुल के विश्वास को और पक्का कर दिया. 

यह भी पढ़ें- पाकिस्तान की चोरी और सीना जोरी, भारत ने निकाल दी...घुसपैठियों पर BSF के एक्शन से भड़का था, मिल गया तगड़ा जवाब

Advertisement

यह भी पढ़ें

रूस के 'सेंटर-2026' के दौरान तालिबान अधिकारियों ने रूसी सेना की उन्नत तकनीक की बड़ी प्रदर्शनी देखी और हथियारों का बारिकी से निरीक्षण किया. इसमें ड्रोन और बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइल, तोपखाने और अन्य हथियार शामिल थे. इस दौरान तालिबान ने युद्ध के तौर तरीकों, आधुनिक युद्ध, प्रशिक्षण की बारीकियां को समझा. इस दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग पर भी जोर दिया. वहीं, रूस के सैन्य अभियान में तालिबान की मौजूदगी पुतिन के लिए भी फायदे का सौदा है. क्योंकि रूस अभी यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहा है. ऐसे में उसे भारी तादाद में सैनिकों की दरकार है. ऐसे में अफगानिस्तान उसे सैन्य मदद देकर आपसी सहयोग को और मजबूत करते हुए अपनी बड़ी मौजूदगी दर्ज करवा सकता है. वहीं, युद्ध के मोर्चे पर अभी तक खुदको अलग-थलग पा रहा तालिबान रूस के सहयोग से अपनी स्थिति और शक्ति को बढ़ा सकता है. जो कि पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें