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प्रधानमंत्री ने रखी थी कुर्सियां, छात्रों ने ‘इस्तीफा’ लिखकर जलाया, अल्बानिया में विरोध की आग ट्रंप तक पहुंचेगी!
एक और देश हिंसा की जद में है. अल्बानिया में छात्रों ने PM ऑफिस में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी. जिन कुर्सियों पर 'डायलॉग' प्रधानमंत्री ने छात्रों से बात करने की पेशकश की थी. उन्हें भी जला दिया गया.
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Protest in Albania: अल्बानिया में छात्रों का प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय की कुर्सियां ही जला दीं. ये कुर्सिया प्रधानमंत्री एडी रामा ने ही कार्यालय के बाहर रखवाईं थीं. इन पर छात्रों से बात करने के लिए ‘डायलॉग’ यानी बातचीत लिखा था.
प्रधानमंत्री एडी रामा ने छात्रों से बात करने की पेशकश की थी. कुर्सियों के साथ उन्होंने PM ऑफिस के बाहर मेज भी रखवाई थी और छात्रों को इन्वाइट किया था. हालांकि छात्रों ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए विरोध जताया.
प्रधानमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़
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छात्रों के उग्र विरोध के कई वीडियोज सामने आए. जिसमें देखा गया कि वह पहले PM ऑफिस के बाहर रखी कुर्सियों को उठा-उठाकर फेंकते हैं, फिर तोड़फोड़ करते हैं और फिर उनमें आग लगा देते हैं. इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने कुर्सियों पर ‘इस्तीफा’ लिखकर भी विरोध जताया था. प्रदर्शनकारियों प्रधानमंत्री कार्यालय के शीशे तोड़े और इमारत पर पथराव किया.
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अल्बानिया में क्यों हो रहे हिंसक प्रदर्शन
अल्बानिया में भी प्रदर्शन के मुद्दे फ्रांस और इटली से मिलते जुलते ही हैं. यहां बढ़ती महंगाई, पढ़ाई के खर्चों में बढ़ोतरी, छात्रों को आर्थिक मदद की मांग, विश्वविद्यालय में बेहतर सुविधाओं की मांग, रोजगार, भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं. इन प्रदर्शनों की आंच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक भी पहुंच सकती है. क्योंकि एडी रामा सरकार के खिलाफ रोष ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के नए रिजॉर्ट को लेकर भी है. इसे पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चिंता जताई जा रही है.
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जेरेड कुशनर का रिजॉर्ट उस परियोजना का हिस्सा है जो प्रकृति के लिहाज से संवेदनशील द्विपों पर तैयार की जा रही है. इसमें एड्रियाटिक सागर पर बने द्विप और व्योसा-नार्ता का तटीय इलाके शामिल हैं. इन्हें पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.
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PM एडी रामा ने कहा था कि उनकी सरकार को पिछले साल हुए लोकतांत्रिक चुनावों में जनादेश मिला था. सरकार का बदलाव चुनावों के जरिए ही होना चाहिए. रामा ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी लोगों की चिंताओं को सुनना, जायज मांगों पर ध्यान देना और अल्बानिया को आगे बढ़ाना है. प्रधानमंत्री ने शिक्षा की बढ़ती लागत पर बातचीत करने की इच्छा जताई, लेकिन सार्वजनिक संस्थानों पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने की घटनाओं की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों का छात्रों की जायज मांगों से कोई संबंध नहीं है.