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पाकिस्तान की साजिश नाकाम, सिंधु जल संधि पर भारत का ‘नो कॉम्प्रोमाइज’, मध्यस्थता कोर्ट के फैसले को MEA ने ठुकराया

Indus Water Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि पर 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' को अवैध बताते हुए उसके फैसले और कार्यवाही को पूरी तरह खारिज किया.

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16 May 2026
( Updated: 16 May 2026
07:33 PM )
पाकिस्तान की साजिश नाकाम, सिंधु जल संधि पर भारत का ‘नो कॉम्प्रोमाइज’, मध्यस्थता कोर्ट के फैसले को MEA ने ठुकराया
Image Source: X/@MEAIndia/Video Grab
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भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित न्यायाधिकरण यानी ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ (COA) को एक बार फिर अवैध करार देते हुए उसके फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया. बाद में आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर कहा कि भारत ने इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी और उसके किसी भी निर्णय, कार्यवाही या आदेश का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. 

भारत ने कोर्ट को अवैध बताया

दरअसल, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में भारत की किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताते हुए मामले को हेग स्थित मध्यस्थता तंत्र तक पहुंचाया था. जिसे लेकर भारत का लगातार यह कहना रहा है कि संधि के प्रावधानों के तहत इस तरह के ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का गठन ही अवैध है. भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया है. 

सिंधु जल संधि पर भारत का फैसला बरकरार

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15 मई 2026 को इस तथाकथित सीओए ने सिंधु जल संधि की व्याख्या और जल भंडारण क्षमता से जुड़े मुद्दों पर एक पूरक फैसला जारी किया, जिसे भारत ने तुरंत खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि को ‘अबयंस’ यानी निलंबित रखने का फैसला अभी भी लागू है.

आतंकवाद और जल सहयोग साथ नहीं

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि पर विराम लगा दिया था. साफ संकेत दिए थे कि सीमा पार आतंकवाद और जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते. अपनी बातों पर रवैया स्पष्ट करते हुए भारत ने संधि के दायित्वों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया था.

सीमा पार आतंकवाद पर भारत का सख्त रूख 

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भारत का रुख स्पष्ट और सख्त है. ये बताता है कि नई दिल्ली अब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों के दुरुपयोग के खिलाफ अधिक आक्रामक और स्पष्ट नीति अपना रही है. सरकार हर वैश्विक मंच पर दोहराती आई है कि आतंकवाद को लेकर वो सख्त है और किसी भी कीमत पर भारत की संप्रभुता या अखंडता पर प्रहार नहीं सह सकती. 

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