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पाकिस्तान फिर हुआ जलील... ईरान-अमेरिका युद्ध के सीजफायर का क्रेडिट लेने वाले शहबाज शरीफ के दावों की ट्रंप ने खोली पोल

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ हुए सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है. शहबाज शरीफ के दावे को बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप पहले ही खारिज कर चुके थे. बुडापेस्ट में जेडी वेंस ने भी कहा कि यह सिर्फ गलतफहमी थी और लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है.

Donald Trump/ Shahbaz Sharif (File Photo)
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ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर समझौते को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था. यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजरायल लगातार लेबनान में हमले कर रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि सीजफायर को लेकर कई देशों के बीच अलग-अलग समझ बनी हुई है. अमेरिका की प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के झूठे दावों की पोल खुल गई, जिसमें उन्होंने युद्धविराम समझौते में लेबनान के होने की भी बात कही थी.

सीजफायर पर गलतफहमी या शहबाज ने बोला झूठ 

दरअसल, हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में मौजूद अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance ) ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया. उन्होंने कहा कि सीजफायर को लेकर गलतफहमी हुई है और ईरान यह मान रहा था कि इसमें लेबनान भी शामिल है, जबकि ऐसा नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के सहयोगियों के बीच तनाव कम करने पर केंद्रित है, जिसमें इजरायल और कुछ अरब देश शामिल हैं.

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ट्रंप का बयान

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इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी इस बात से इनकार कर चुके हैं कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा है. उन्होंने साफ कहा कि लेबनान को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है, जिसकी एक बड़ी वजह वहां सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि लेबनान में चल रही झड़पें इस समझौते से अलग हैं और उन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए.

पाकिस्तान के दावों की खुली पोल 

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इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है. उन्होंने पहले दावा किया था कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर में लेबनान भी शामिल है. उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई. बाद में अमेरिका और इजरायल के बयानों ने इस दावे को गलत साबित कर दिया, जिससे पाकिस्तान की स्थिति थोड़ी असहज नजर आई.

इजरायल का सख्त रुख

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने भी साफ कर दिया है कि लेबनान में चल रहे सैन्य अभियान इस सीजफायर के दायरे में नहीं आते. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई को नहीं रोकता. यही वजह है कि सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए. इन हमलों में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं.

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होर्मुज जलमार्ग बंद

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग को बंद कर दिया है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है. ईरान के इस फैसले के बाद अमेरिका ने तुरंत इसे खोलने की मांग की है. जानकारों का मानना है कि अगर यह जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

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बहरहाल, मौजूदा स्थिति देखा जाए तो ईरान और अमेरिका के बीच हुआ यह सीजफायर समझौता अभी बेहद नाजुक स्थिति में है. लेबनान को लेकर पैदा हुई गलतफहमी और इजरायल के लगातार हमलों ने हालात को और जटिल बना दिया है. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि यह युद्धविराम कब तक टिक पाएगा. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब भी उम्मीद है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए हालात को संभाला जा सकता है और क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं.

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