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पाकिस्तान की मेजबानी रही नाकाम... ईरान के साथ बैठक में ऐसा क्या हुआ कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दे दी अंतिम चेतावनी?
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर पूरा हो चुका है. कई घंटे तक चली इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कोई भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची.
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर पूरा हो चुका है. कई घंटों तक चली इस अहम बैठक में तीन देशों की भागीदारी रही. अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने के लिए पाकिस्तान ने जिस उद्देश्य के साथ इस बैठक की मेजबानी की थी, वह सफल नहीं हो सकी क्योंकि यह बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई. पाकिस्तान ने इस उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की थी.
इस्लामाबाद में हुई वार्ता में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. पहला, पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम को मजबूत करना. दूसरा, लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकने की संभावनाएं तलाशना और तीसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना. यह वही समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. उनके साथ जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मौजूद रहे. ईरान की तरफ से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बातचीत की कमान संभाली. वहीं पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने मेजबानी की जिम्मेदारी निभाई.
तनावपूर्ण माहौल में बातचीत
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बैठक के दौरान माहौल शुरुआत से ही तनावपूर्ण बताया गया. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाजों पर संभावित हमलों की चेतावनी दी और साथ ही अपने फ्रीज किए गए आर्थिक एसेट्स को खोलने की मांग भी दोहराई. दूसरी ओर अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और वहां किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस मार्ग को खुला रखना अमेरिका की प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
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वार्ता के बाद जेडी वेंस ने क्या कहा?
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने मीडिया को जानकारी दी कि यह बातचीत किसी भी निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सकी और वार्ता असफल रही. उन्होंने कहा कि अब वह अमेरिका लौट रहे हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को पूरी स्थिति की रिपोर्ट देंगे. वेंस ने कहा, अमेरिका की ओर से बातचीत में ईमानदारी और समाधान की मंशा थी, लेकिन ईरान की तरफ से समझौते की शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई. उन्होंने बताया कि अमेरिका अपनी तरफ से अंतिम प्रस्ताव देकर वापस जा रहा है और आगे इस पर निर्णय ईरान को लेना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति अमेरिका के लिए निराशाजनक जरूर है, लेकिन इससे अधिक यह ईरान के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समझौते का अवसर अभी भी मौजूद है. उनके मुताबिक, बातचीत करीब 21 घंटे तक चली, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी.
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ट्रंप का बयान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी माहौल को और गरमा दिया. उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में कमजोर हो चुकी है और उसके कई बड़े नेता अब सक्रिय नहीं हैं. हालांकि उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है. हालांकि वार्ता विफल रही, लेकिन दोनों पक्षों ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं. कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में फिर से संपर्क की संभावना बनी हुई है. पाकिस्तान ने भी उम्मीद जताई है कि यह प्रयास भविष्य में किसी स्थायी शांति समझौते की दिशा में एक आधार बन सकता है.
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बताते चलें कि मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए जानकारों का मानना है कि इस वार्ता की विफलता के बावजूद संवाद जारी रहना एक सकारात्मक संकेत है. क्योंकि वर्तमान समय में पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान अपने मतभेदों को दूर कर किसी नए समझौते की ओर बढ़ेंगे या तनाव की यह स्थिति और गहराएगी.