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‘नो वॉर, फुल कंट्रोल...’, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका ने की ईरान की घेराबंदी, ट्रंप बोले- जंग खत्म होने के करीब

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी ब्लॉकेड का असर पहले दिन ही दिखा. ईरान से कोई जहाज नहीं निकला, 6 लौटे. बिना गोली ‘साइलेंट प्रेशर’ से असर, जबकि अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सामान्य रहा.

‘नो वॉर, फुल कंट्रोल...’, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका ने की ईरान की घेराबंदी, ट्रंप बोले- जंग खत्म होने के करीब
Image Source: Canva/ IANS
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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है. अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड का असर पहले ही दिन साफ नजर आने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरे दिन ईरान के किसी भी बंदरगाह से कोई जहाज बाहर नहीं निकला. इतना ही नहीं, करीब छह व्यापारी जहाज अमेरिकी चेतावनी के बाद रास्ते से ही वापस लौट गए. हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान एक भी गोली नहीं चली और किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ी. इसके बावजूद असर इतना मजबूत रहा कि ईरान से जुड़ा समुद्री ट्रैफिक लगभग ठहर गया. विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट प्रेशर’ की रणनीति बता रहे हैं, जिसमें बिना सीधे टकराव के ही विरोधी को पीछे हटने पर मजबूर किया जाता है.

अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक रहा सामान्य

वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रही. पिछले 24 घंटों में 20 से ज्यादा कमर्शियल जहाज इस स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के गुजरे. इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका का यह कदम पूरी तरह टारगेटेड है. यानी यह ब्लॉकेड केवल ईरान से जुड़े जहाजों पर असर डाल रहा है, जबकि बाकी देशों के लिए रास्ता खुला रखा गया है.

ट्रंप ने बताया बड़ी रणनीतिक सफलता

इस पूरे घटनाक्रम पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसे बड़ी रणनीतिक सफलता बताया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि यह ऑपरेशन बेहद प्रभावी रहा और ईरान बिना टकराव के ही दबाव में आ गया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार हो सकता था. जब उनसे जंग की स्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ‘जंग खत्म होने के करीब है.’ हालांकि उनके इस बयान से यह भी साफ होता है कि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.

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ईरान का संयम बरकरार 

दूसरी तरफ, ईरान ने फिलहाल संयम का रास्ता अपनाया है. जहाजों का वापस लौटना इस बात का संकेत है कि तेहरान सीधे टकराव से बचना चाहता है. यह एक रणनीतिक चुप्पी भी हो सकती है, जिसमें ईरान स्थिति को भांपते हुए आगे की योजना बना रहा है. जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित होंगे. यही तय करेंगे कि ईरान इस दबाव को स्वीकार करता है या फिर कोई बड़ा जवाबी कदम उठाता है. अगर ईरान ने स्ट्रेट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई या अमेरिकी जहाजों को चुनौती देने की कोशिश की, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं.

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बताते चलें कि बिना एक भी गोली चले अमेरिका ने अपनी ताकत और रणनीति का असर दिखा दिया है. लेकिन यह शांति कितने समय तक बनी रहेगी, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा. फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई हैं.

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