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‘अभी तो तीन हफ्ते ही हुए हैं’ ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने उड़ाया ट्रंप का मजाक, दबाव बना रहे अमेरिका को दी चेतावनी

जंग में ईरान के सर्वोच्च लीडर अली खामेनेई के साथ बड़े नेता और टॉप कमांडर को ढेर करने वाले अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है. ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप को दो टूक चेतावनी दे दी है.

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Iran US War: ईरान दो तरफा जंग से घिरा हुआ है. अमेरिका पूरी ताकत के साथ ईरान के सैन्य और राजनीतिक वर्चस्व को खत्म करने में जुटा हुआ है. इसमें इजरायल उसका पूरा साथ दे रहा है. अमेरिका की कोशिश ईरान को हर मोर्चे पर तोड़ने की है, लेकिन ईरान है कि मानता नहीं, वह झुकने को तैयार नहीं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अब डोनाल्ड ट्रंप का मजाक बनाया है. 

जंग में ईरान के सर्वोच्च लीडर अली खामेनेई के साथ बड़े नेता और टॉप कमांडर को ढेर करने वाले अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि ये युद्ध अमेरिका के लोगों को भारी पड़ रहा है. 

अमेरिकी लोग भुगतेंगे खामियाजा- अराघची

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अराघची ने अपने हालिया बयान और पोस्ट में कहा कि बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप ने यह युद्ध केवल ईरान ही नहीं, बल्कि अमेरिकी लोगों पर भी थोप दिया है. जंग का असली खर्च इससे कहीं ज्यादा होगा. उन्होंने दावा किया, तीन हफ्तों का ये युद्ध तो सिर्फ आइसबर्ग का सिर्फ ऊपरी हिस्सा ही है. इसके बाद जो कुछ होगा, वो अमेरिका के लोगों को झल्ला देगा. 

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उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘ईरानियों और अमेरिकियों दोनों पर थोपे गए इस स्वेच्छा से शुरू किए गए युद्ध को अभी केवल तीन सप्ताह ही हुए हैं. यह 200 अरब डॉलर तो बस हिमबर्ग का एक छोटा सा हिस्सा है. आम अमेरिकी बेंजामिन नेतन्याहू और कांग्रेस में उनके चमचों को उस खरबों डॉलर के ‘इजराइल फर्स्ट टैक्स’ के लिए धन्यवाद दे सकते हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने वाला है.’

ईरानी विदेश मंत्री ने इस जंग में अमेरिका के अंदर मचे घमासान पर भी वार किया. उन्होंने कहा, ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ही युद्ध शुरू कर दिया था. अराघची ने इस संघर्ष को ‘वॉर ऑफ चॉइस’ यानी जानबूझकर चुनी गई जंग बताया, जिसका जिम्मेदार उन्होंने इजरायल को भी ठहराया. अराघची ने दावा किया कि अमेरिका पर इस जंग का गहरा असर पड़ेगा. उन्होंने अमेरिका के युद्ध बजट को ट्रंप की ‘इजरायल फर्स्ट टैक्स’ नीति करार दिया. जिसका बोझ आम अमेरिकी नागरिक उठाएंगे. जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं. दरअसल, ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका में अंदर तक घमासान मचा हुआ है. डेमोक्रेटिक पार्टी के बड़े नेताओं ने ट्रंप से युद्ध रोकने की मांग की है. उन्होंने इस जंग को गैरकानूनी बताया. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार ने इस जंग की असली वजह नहीं बताई. 

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अमेरिका को महंगा पड़ रहा युद्ध 

बताया जा रहा है अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस जंग के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा की मंजूरी मांगी गई है. अब तक 30 अरब डॉलर तक खर्च हो चुके हैं. जंग के कारण अमेरिका की अर्थव्यवस्था डगमगाती दिख रही है. पेट्रोल की कीमतें 30 साल के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. आर्थिक वृद्धि घटकर 0.7% रह गई है, बेरोजगारी बढ़ी है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हजारों नौकरियां गई हैं. 

NATO देशों ने छोड़ा ट्रंप का साथ 

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जंग में अमेरिका के अपने दोस्त ही उस पर सवाल उठ रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर NATO देशों और साथी देशों ने ट्रंप से किनारा कर लिया. द गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि NATO देशों ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया कि वह होर्मुज के रास्ते को खुलवाने में US की कोई मदद नहीं कर सकते. वह अपना वॉरशिप नहीं भेजेंगे. इसमें ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश शामिल हैं. 

यह भी पढ़ें- ‘ये हमारी लड़ाई नहीं…’ NATO देशों की ट्रंप को दो टूक, ईरान से जंग में अकेले पड़े, होर्मुज पर किया किनारा

28 फरवरी को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस जंग में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत बड़े नेता और सेना के टॉप कमांडर मारे गए हैं. इजरायल ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी के मारे जाने का भी दावा किया है. उन्हें खामेनेई का करीबी माना जाता है. खामेनेई की मौत के बाद सभी फैसले वही ले रहे थे, क्योंकि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अभी तक सामने नहीं आए हैं. बदले में ईरान भी मिडिल ईस्ट से अमेरिका को निशाना बना रहा है. 

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