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हिजबुल्लाह पर इजरायली सेना की बमबारी, पलटवार में दागे गए मिसाइल, जिद में लेबनान बना जंग का अड्डा!

आखिर हिजबुल्लाह लेबनान को युद्ध की स्थिति में क्यों धकेलना चाह रहा है? दरअसल, हिजबुल्लाह की जिद है कि इजरायल उसकी जमीन छोड़े. वहीं, लेबनान की राजनीति में भी हिजबुल्लाह का प्रभाव है.

Image Source- IANS/X/@netanyahu
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भले ही अमेरिका-ईरान की जंग थम गई हों, लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव की लपटें अभी ठंडी नहीं हुई. इजरायल का ईरान समर्थित लेबनान पर हमला जारी है. लेबनान और इजरायल एक नए वॉर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. जो पूरे मिडिल ईस्ट के लिए नई टेंशन हो सकती है. 

ईरान के प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह और इजरायली सेना के बीच लेबनान में आक्रामक झड़प और वार हुए. इजरायल इस बात पर अड़ा है कि हिजबुल्लाह अपने हथियार छोड़े. क्योंकि वह इजरायल के शहरों को निशाना बना रहा है. वहीं, इजरायल भी हिजबुल्लाह के ठिकानों को तबाह करने पर तुला है. जिसका खामियाजा लेबनान की जनता भुगत रही है. 

इजरायल और हिजबुल्लाह दोनों जिद पर अड़े 

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इजरायल और हिज्बुल्लाह की ये जिद नए लेबनान को नए मानवीय संकट की ओर धकेल रही है. इसके साथ ही लेबनान की कमजोर आर्थिक व्यवस्था पर भी ये बड़ी चोट है. ईरान का रुख है कि दोनों देशों को एक जंग तुंरत बंद कर देनी चाहिए, लेकिन नेतन्याहू का कहना है कि हिजबुल्लाह रॉकेट और हथियारों से इजरायल को निशाना बना रहा है. जब तक वह हथियार नहीं छोड़ता इजरायल पीछे नहीं हटेगा.

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इजरायल ने ये तर्क भी दिया कि हिजबुल्लाह ने पिछली वार्ता में हथियार छोड़ने का वादा किया था लेकिन उस पर खरा नहीं उतरा.  इसके बाद इजरायल हिजबुल्लाह पर फिर भरोसा करने की स्थिति में नहीं है. हिजबुल्लाह का एक कदम और इजरायल लेबनान पर बम की बारिश कर सकता है. 

क्या है हिजबुल्लाह की जिद? 

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आखिर हिजबुल्लाह लेबनान को युद्ध की स्थिति में क्यों धकेलना चाह रहा है? दरअसल, हिजबुल्लाह की जिद है कि इजरायल उसकी जमीन छोड़े. वहीं, लेबनान की राजनीति में भी हिजबुल्लाह का प्रभाव है. क्योंकि लेबनान सरकार कमजोर है, देश का आर्थिक ढांचा बिगड़ चुका है, अस्थिरता और विभिन्न गुटों में मतभेद हावी है. हिजबुल्लाह का दावा है कि ऐसी स्थिति में वह लेबनान का रक्षक बनकर काम कर रहा है, लेकिन हिजबुल्लाह के इस कदम में लेबनान सरकार का साथ उसे नहीं मिल रहा है. हिजबुल्लाह पर इजरायल की कार्रवाई पूरे लेबनान को प्रभावित कर सकती है. इजरायल सुरक्षा गारंटी चाहता है और हिजबुल्लाह लेबनान की मुक्ति. 

हिजबुल्लाह को ईरान सरकार से पूरा समर्थन मिल रहा है क्योंकि अमेरिका-इजरायल के साथ जंग में हिजबुल्लाह ने उसका प्रॉक्सी संगठन बनते हुए लड़ाई लड़ी थी. ऐसे में उसे ईरान से न केवल हथियारों का समर्थन मिलता है बल्कि ट्रेनिंग और फंडिंग भी होती है. 

ईरान ने इजरायल को चेतवानी जारी की है कि वह लेबनान पर हमले तुरंत बंद करें. हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग की आंच में एक बार फिर ईरान भी जल सकता है. 

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इजरायल लेबनान में मचाएगा बड़ी तबाही!

इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच छोटी-छोटी जंग लेबनान में बड़ी तबाही मचा सकती हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में इजरायल के कई फाइटर जेट्स को उड़ते हुए देखा गया है. माना जा रहा है हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का नया मिशन शुरू कर दिया है, लेकिन असली रणनीति क्या है यह अभी साफ नहीं हो पाया है. वहीं, हिजबुल्लाह भी लेबनान में इजरायली ठिकानों को निशाना बना रहा है. हिजबुल्लाह की ओर से मिसाइल दागे जा रहे हैं. 

एक तरफ इजरायल की जिद है कि वो हिजबुल्लाह को नहीं छोड़ेगा, तो दूसरी ओर हिजबुल्लाह ने भी साफ कर दिया कि हम पीछे नहीं हटेंगे और पलटवार के लिए हमेशा तैयार हैं. 

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होर्मुज के पास फिर बढ़ा तनाव, जहाज पर हमला 

वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर अभी पूरी तरह हुआ भी नहीं कि होर्मुज के पास तनाव की खबर आ रही है. ओमान के तट के पास गुरुवार को एक मालवाहक जहाज को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया गया. इस हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा. हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ. यूकेएमटीओ के अनुसार, संबंधित अधिकारी इस हमले की जांच कर रहे हैं, साथ ही, इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है. 

इससे पहले गुरुवार को, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नौसेना ने कहा था कि होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने के लिए केवल वही मार्ग अधिकृत हैं, जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने घोषित किया है. 

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यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्‍ट्रेट और उसके आसपास समुद्री यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) और ओमान ने एक नया सुरक्षा गलियारा (सेफ्टी कॉरिडोर) शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से फंसे हुए जहाजों और नाविकों को सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करना है. 

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