×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

US के साथ Trade Deal में कहां फंसा है पेंच? केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की दो टूक, कहा- डील तभी होगी जब...

अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर पीयूष गोयल ने कहा, दोनों पक्षों के बीच समझौते को लेकर क्लियरिटी है. केवल विस्तृत कानूनी और टैरिफ संरचना को पूरा किया जाना बाकी है.

US के साथ Trade Deal में कहां फंसा है पेंच? केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की दो टूक, कहा- डील तभी होगी जब...
Image Source- File Photo/IANS
Advertisement

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और US के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच डील पूरी तरह फाइनल है, लेकिन यह तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक भारत को व्यापारिक लेनदेन में श्रीलंका, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड और फिलिपींस जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ लाभ नहीं मिल जाता. 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का इससे साफ मतलब ये था कि भारत टैरिफ में रियायत चाहता है. टैरिफ का पेंच फंसा होने के कारण ही दोनों देशों के बीच ट्रेड डील भी फंसी है. दरअसल, पीयूष गोयल लंदन में आयोजित इंडिया ग्लोबल फोरम की यूके-इंडिया वीक 2026 में शामिल हुए थे. यहां उन्होंने टैरिफ और ट्रेड दोनों पर बात की. 

केंद्रीय मंत्री ने US के साथ ट्रेड डील पर क्या कहा? 

पीयूष गोयल ने कहा, ऐसे मंच लोगों को एक-दूसरे से सीखने और साझेदारी को मजबूत करने का बेहतरीन अवसर देते हैं. अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर उन्होने कहा, दोनों पक्षों के बीच समझौते को लेकर क्लियरिटी है. केवल विस्तृत कानूनी और टैरिफ संरचना को पूरा किया जाना बाकी है.

उन्होंने बताया कि भारत-US के बीच 6 फरवरी को ही डील हो गई थी. उस समय दोनों ने इसकी पुष्टि भी की थी. अब दोनों की टीमें इसे अंतिम रूप देने में जुटी हुई हैं. पीयूष गोयल ने कहा है, 

Advertisement

‘जब तक भारतीय निर्यातकों को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक टैरिफ लाभ (Comparative Tariff Advantage) देने वाला ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.’

पीयूष गोयल ने साफ किया कि ट्रेड डील से पहले टैरिफ पर भारत को कई देशों के मुकाबले ज्यादा छूट मिलनी चाहिए. सबसे अहम मुद्दा यह है कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ स्थिति कैसे मिले. उन्होंने कहा, अमेरिका ऐसे कानूनी और नीतिगत विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनके जरिए भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दी जा सके. 

US-भारत के बीच क्या प्रस्ताव रखा गया था? 

इस साल फरवरी में प्रस्ताव के तहत अमेरिका भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था. इसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद से जुड़े भारतीय सामानों पर लगने वाली अतिरिक्त 25 प्रतिशत ड्यूटी को तुरंत हटा दिया गया था, जिसके बदले में भारत ने कुछ अमेरिकी उत्पादों को बाजार तक आसान पहुंच देने और ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही थी.

Advertisement

पीयूष गोयल ने बताया कि इस 18 प्रतिशत की दर के कारण भारत को अपने सभी पड़ोसी देशों और सिंगापुर को छोड़कर बाकी आसियान (ASEAN) देशों के मुकाबले बढ़त मिल रही थी, इसीलिए यह डील हमारे लिए आकर्षक थी.

पीयूष गोयल ने साफ किया कि अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए उदार नीति अपनाएगा, तभी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अंतिम मुहर लगेगी. इसका मतलब है कि भारत चाहता है अमेरिका अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की बजाय भारत के लिए दरवाजे खोले. 

यह भी पढ़ें- सीधे नेतन्याहू से ऑर्डर, स्विटजरलैंड में था मुनीर के खात्मे का प्लान! विदेशी पत्रकार के दावे से उड़ी पाकिस्तान की नींद

यह भी पढ़ें

अपने बयान में पीयूष गोयल ने टैरिफ मामले में US की अदालत में चल रहे मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा,  24 जुलाई को खत्म हो रहे इस अस्थायी टैरिफ और अदालती फैसलों के बाद, हमारे पास समझौते को लागू करने के लिए कोई ठोस और फायदेमंद कारण होना चाहिए. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें