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ट्रंप की धमकी फेल, टैरिफ का भी नहीं पड़ा असर...बढ़ गया भारत का रूस से तेल आयात, अकेले जून में 34% की बढ़ोतरी

भारत और रूस की दोस्ती और व्यापारिक साझेदारी अटूट रही है. इसका प्रमाण एक बार फिर देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की लगातार धमकियों, पेनाल्टी के बावजूद भारत झुका नहीं और धैर्य से काम लिया, जिसका फायदा अब साफ तौर पर दिख रहा है.

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12 Jul 2026
( Updated: 12 Jul 2026
09:00 PM )
ट्रंप की धमकी फेल, टैरिफ का भी नहीं पड़ा असर...बढ़ गया भारत का रूस से तेल आयात, अकेले जून में 34% की बढ़ोतरी
PM Modi-Putin Meeting/ Image Source: IANS
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इसी बीच भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जून में 34 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब यूरो रहा है. आयात में बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई. यह जानकारी सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ओर से जारी रिपोर्ट में दी गई.

बढ़ा भारत का रूस से तेल का आयात!

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की ओर से जून में रूस से 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल आयात किया है. इसमें मई के मुकाबले 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जून में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत थी, जिसकी कीमत 5.5 अरब यूरो थी. इस तरह भारत, चीन के बाद रूसी हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया.

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खरीद में यह बढ़ोतरी भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ हुई, जिसमें कई बड़ी रिफाइनरियों को रूसी आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी देखी गई.

सीआरईए के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात पिछले महीने के मुकाबले 150 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की पारादीप रिफाइनरी में 126 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कोच्चि रिफाइनरी ने आयात में 83 प्रतिशत की वृद्धि की और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में शिपमेंट 45 प्रतिशत बढ़ गया.

क्यों बढ़ी कच्चे तेल की मांग?

जून में भारत की तरफ से ज्यादा मांग के कारण रूस के कच्चे तेल के निर्यात में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. हालांकि, कच्चे तेल की कम कीमतों का असर निर्यात से होने वाली कमाई पर पड़ा, जिससे रूस के कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कमाई मासिक आधार पर घटकर 348 मिलियन यूरो प्रति दिन रह गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर रूस के जीवाश्म ईंधन के निर्यात से होने वाली कमाई 1 प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो प्रति दिन रह गई, जबकि महीने के दौरान निर्यात की मात्रा में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.

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सीआरईए ने कहा, "जून 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया. भारत की कुल खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत थी, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो थी."

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि रूस से भारत के बाकी आयात में 488 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला शामिल था.

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