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सोना हुआ सस्ता! ₹1.42 लाख के नीचे आया भाव, चांदी में ₹5200 की भारी गिरावट

Gold Price: सोना और चांदी की कीमतें आमतौर पर डॉलर में तय होती हैं. ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है. इससे खरीदारी कम होती है और कीमतों पर दबाव आने लगता है. यही वजह है कि तनाव के माहौल के बावजूद सोने-चांदी में गिरावट देखने को मिली.

सोना हुआ सस्ता! ₹1.42 लाख के नीचे आया भाव, चांदी में ₹5200 की भारी गिरावट
Image Source: Canva (Representative Image)
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Gold Price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने का भाव 1,41,977 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. यह पिछले बंद भाव से लगभग 1,578 रुपये नीचे था. वहीं चांदी की कीमत भी गिरकर 2,17,400 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, जिसमें करीब 5,280 रुपये की बड़ी गिरावट देखने को मिली. बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और उसके बाद अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है.

कच्चे तेल की तेजी ने बदला बाजार का रुख

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की तेजी आई. जब तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निवेशकों का ध्यान डॉलर की तरफ बढ़ा, जिससे अमेरिकी मुद्रा मजबूत हो गई.

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सोना और चांदी की कीमतें आमतौर पर डॉलर में तय होती हैं. ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है. इससे खरीदारी कम होती है और कीमतों पर दबाव आने लगता है. यही वजह है कि तनाव के माहौल के बावजूद सोने-चांदी में गिरावट देखने को मिली.

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अमेरिका और ईरान के तनाव का बाजार पर असर

मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के बाजारों के लिए चिंता का विषय बन जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं. ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान दिए गए हैं. यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है. अगर इस रास्ते पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है. इसी डर से निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला..

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अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से बढ़ी अनिश्चितता

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद बाजारों में अस्थिरता और बढ़ गई. ऐसी घटनाओं के दौरान निवेशक अक्सर अपने पैसे को अलग-अलग जगहों पर लगाना शुरू करते हैं और बाजार में अचानक खरीद-बिक्री बढ़ जाती है.
कई बार युद्ध जैसे हालात में लोग सोने की तरफ जाते हैं, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने सोने पर दबाव बना दिया. यानी एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव था, तो दूसरी तरफ आर्थिक कारणों ने सोने-चांदी की कीमतों को नीचे खींच लिया.

महंगाई बढ़ने का डर और ब्याज दरों की चिंता

तेल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा असर महंगाई पर पड़ सकता है. जब ईंधन महंगा होता है, तो परिवहन से लेकर रोजमर्रा की कई चीजों की लागत बढ़ जाती है. इससे महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है.

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महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं या उन्हें और सख्त कर सकते हैं. ज्यादा ब्याज दरों के माहौल में निवेशक अक्सर ऐसे विकल्पों की ओर जाते हैं जहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिल सके. इसका असर सोने जैसे निवेशों पर पड़ता है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता.

 

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Input-IANS 

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