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जंग में घिरे ईरान का खौफनाक कदम… 19 साल के रेसलर को सरेआम फांसी पर लटकाया, हैरान कर देगी वजह

ईरान में 19 साल के रेसलर सालेह मोहम्मदी को कोम शहर में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया. ईरानी हुकूमत के इस कदम ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया.

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International wrestling star Saleh Mohammadi: जंग में झुलस रहे ईरान से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है. यहां एक 19 साल के रेसलर को सबके सामने फांसी पर लटका दिया गया. ईरान के कोम शहर में उभरते इंटरनेशनल रेसलर सालेह मोहम्मदी को सरेआम ये सजा दी गई. 

आसमान में उड़ते ड्रोन, बरसती मिसाइलों के बीच ईरान पर दमनकारी शासन हावी हो रहा है. सालेह मोहम्मदी को 19 मार्च 2026 को कोम शहर में सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई. इस घटना ने ईरान समेत पूरी दुनिया को झकझोर दिया. सालेह मोहम्मदी जनवरी 2026 से जेल में कैद थे. उन पर दो पुलिस अधिकारियों की हत्या का आरोप है. 

‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध मानते’ हुए दी सजा

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सालेह मोहम्मदी जनवरी 2026 में हुए प्रदर्शन में शामिल थे. भारी हिंसा के बाद उन्हें जेल भेजा गया था. उनके साथ दो और एथलीट भी जेल भेजे गए थे. इस प्रदर्शन में भारी तादाद पर आम लोग और दो पुलिस अधिकारी मारे गए थे. इसी मामले में उन्हें ‘मोहारेबेह’ यानी ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ और हत्या का दोषी माना गया. इसे इतना गंभीर अपराध माना जाता है जिसमें सजा केवल मौत होती है. 

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मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल 

19 साल के रेसलर को फांसी पर लटकाए जाने के फैसले से दुनिया भी हैरान है. आरोप सिद्ध होने और ट्रायल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मुकदमा निष्पक्ष नहीं था. सालेह और अन्य आरोपियों को यातना देकर बयान लिए गए हैं. न तो उन्हें कानूनी मदद मिली न ही निष्पक्षता थी. 

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सालेह पर आरोप हैं कि उन्होंने 8 जनवरी 2026 को हुए प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिसकर्मियों पर तलवार और चाकुओं से हमला किया था. 

कौन थे सालेह मोहम्मदी? 

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सालेह मोहम्मदी का जन्म 2007 में हुआ था 
वह मार्च 2026 में ही वे 19 साल के हुए थे
सालेह मोहम्मदी एक ईरानी फ्रीस्टाइल पहलवान थे
वह ईरान की राष्ट्रीय कुश्ती टीम के सदस्य थे 
2024 में रूस में हुए साइटिएव कप में कांस्य पदक भी जीता 
मोहम्मदी ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ईरान का प्रतिनिधित्व किया था 

ईरान के खिलाड़ियों में डर का माहौल 

सालेह मोहम्मदी की मौत के बाद दुनियाभर में आक्रोश है. लोगों ने इसे स्वतंत्र आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक कदम बताया. जेलों में बंद दूसरे खिलाड़ियों को भी फांसी का डर है. 200 से ज्यादा खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) अपील कर कार्रवाई की मांग की है.

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