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खामेनेई की फोटो पर सिगरेट सुलगाने वाली महिलाओं ने किया ‘चीयर्स’, दो तस्वीरें जो ईरान में दे रही नई ‘आजादी’ का संकेत

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में दो तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं. जो महिलाओं की हिम्मत, निडरता और सत्ता के खिलाफ चुनौती का प्रतीक बन गईं.

Israel Iran War: इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद एक तरफ मातम है तो दूसरी ओर जश्न का माहौल है. जश्न जो कभी विरोध की तस्वीर थी. सब्र का बुलबुला फूट पड़ा और अब सड़कों पर  आजादी को सेलिब्रेट किया जा रहा है. जश्न मनाती ये वो ही महिलाएं हैं जो बंदिशों के खिलाफ खामेनेई की तस्वीरें जला रही थीं.

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में दो तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं. जो महिलाओं की हिम्मत, निडरता और सत्ता के खिलाफ चुनौती का प्रतीक बन गईं. कट्टर इस्लामी शासन से आजाद हुईं लड़कियों की फोटो वायरल हो रही है. जिसने दुनियाभर में नई बहस छेड़ दी है. क्या ईरान में धार्मिक बंदिशों से मुक्ति का नया अध्याय लिखा जाएगा? 

सिगरेट से खामेनेई की तस्वीर जलातीं महिला

ये तस्वीर उस समय की है जब ईरान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर उग्र विरोध प्रदर्शन हुए. हिजाब और सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर उतरीं और खुलकर सत्ता का विरोध किया. इस दौरान उन्होंने सिगरेट से खामेनेई की तस्वीर जलाई. इस तस्वीर को डर की दीवार टूटने का प्रतीक माना गया. 

टकराते ग्लास, ‘चीयर्स' के साथ जश्न

सोशल मीडिया पर वायरल दूसरी तस्वीर में महिलाएं शैंपेन के साथ जश्न मना रही हैं. दो ग्लास टकराकर ‘चीयर्स’ किया जा रहा है. महिलाओं ने इस फोटो के साथ कैप्शन में लिखा है, ‘चीयर्स, मुशाली की दयनीय मौत पर खुशी मनाओ, जैसा की राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, वह चूहे की तरह मरा.’ दावा किया जा रहा है कि यह वो ही महिलाएं हैं जो खामेनेई की फोटो को सिगरेट से सुलगा रही थीं. अब वही महिलाएं उनकी मौत पर चीयर्स कर रही हैं. 

ईरानी महिलाओं का संघर्ष दुनिया में मुद्दा बना 

ईरान में पिछले कुछ सालों में महिलाओं के अधिकारों पर उग्र प्रदर्शन हुए हैं. हिजाब के फरमान और मोरल पुलिसिंग के नाम पर मजहबी फरमान थोपे गए. जिसके विरोध में हजारों आवाजें मुखर हुईं. साल 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया. यह दो तस्वीरें अब पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही हैं. जो विरोध से धार्मिक आजादी तक की यात्रा को दर्शाती हैं. ईरान में महिलाओं ने न केवल बंदिशों का विरोध किया बल्कि सत्ता को सीधी चुनौती भी दे डाली थी. 

ईरान में सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन का संकेत 

ईरान के नेतृत्व में कभी महिलाओं को जगह नहीं मिली. अब सवाल उठता है कि नई सत्ता ईरान में महिलाओं को सामाजिक स्वतंत्रता देगी. नए सर्वोच्च लीडर के सामने कई चुनौतियां होंगी, जिससे निपटने के लिए उन्हें जनता के पुरजोर समर्थन की दरकार है. ऐसे में देश के अंदर उठते रोष को रोकने के लिए नया शासन ड्रेस कोड, सामाजिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकारों में धीरे-धीरे छूट दे सकता है. जैसा सऊदी अरब ने किया. खामेनेई की मौत और ईरान में जश्न मनाती महिलाओं की इन तस्वीरों ने उनकी वैचारिक आजादी की मांग को और बुलंद कर दिया. 

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