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भारत ने पाकिस्तान के कॉफी क्लब को लताड़ा, UNSC में केवल अस्थायी सदस्यता बढ़ाने के प्रस्ताव को किया खारिज, जमकर क्लास लगाई

भारत ने यूएनएससी में पूर्ण सुधार की वकालत करते हुए दो टूक कहा है कि केवल अस्थायी देशों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव 'विफलता के करीब' है. इतना ही नहीं भारत ने इटली और पाकिस्तान की सदस्यता वाले कॉफी क्लब को भी लताड़ लगाई.

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16 Jun 2026
( Updated: 16 Jun 2026
05:03 PM )
भारत ने पाकिस्तान के कॉफी क्लब को लताड़ा, UNSC में केवल अस्थायी सदस्यता बढ़ाने के प्रस्ताव को किया खारिज, जमकर क्लास लगाई
Indian Ambassador to UN P. Harish / IANS
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक और ठोस सुधार की मांग करते हुए केवल अस्थायी सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. UNSC में रिफॉर्म पर वैश्विक और लंबी बहस के बीच भारत ने इस प्रस्ताव को “विफलता की कगार पर पहुंचा हुआ” करार दिया है. भारत ने दो टूक कहा है कि विश्व संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था में सार्थक और व्यापक सुधार की आवश्यकता है, न कि केवल सीमित बदलावों की.

भारत ने UNSC में सुधारों पर दिया जोर

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि स्थायी सदस्यता का विस्तार किए बिना सुधार करने से 'P5' यानी पांच स्थायी सदस्यों- ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका की निर्णय लेने की संरचना में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आएगा.

उन्होंने सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में कहा, “समूहों और सदस्य देशों ने वास्तविक और सार्थक बदलाव के लिए लंबे समय तक इंतजार किया है. यदि सुधार केवल अस्थायी सदस्यता तक सीमित रहा, तो UNSC सुधार विफलता की कगार पर पहुंच जाएगा.”

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भारत ने पाकिस्तान के कॉफी क्लब को लताड़ा

इटली के नेतृत्व वाला यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (UFC) समूह, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है, नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने का विरोध करता रहा है. भारत का आरोप है कि यह समूह सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में प्रक्रियागत उपायों का इस्तेमाल कर बाधा उत्पन्न करता है.

क्या है कॉफी क्लब?

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UFC को अनौपचारिक रूप से ‘कॉफी क्लब’ भी कहा जाता है. 1990 के दशक में गठित यह समूह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध करता रहा है.

UFC की प्रमुख रणनीति यह रही है कि ऐसे वार्ता-पाठ (नेगोशिएटिंग टेक्स्ट) को अपनाने से रोका जाए, जो सुधारों पर ठोस चर्चा का आधार बन सके और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करे. उनका कहना है कि बातचीत का टेक्स्ट बनने से पहले आम सहमति होनी चाहिए, जो बातचीत से आम सहमति बनने के विचार के बिल्कुल उलट है.

भारतीय प्रतिनिधि हरीश ने कहा, “‘जब तक हर मुद्दे पर सहमति न बन जाए, तब तक किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं मानी जाएगी’ जैसी सोच को प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया जाना चाहिए.” यूएफसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “यथास्थितिवादी पक्षों ने इस तर्क का इस्तेमाल अपने हित में किया है और इस प्रकार सुरक्षा परिषद में मौजूद असमानताओं को और मजबूत किया है.”

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उन्होंने कहा, “आईजीएन, यूएन की दूसरी प्रक्रिया से बिल्कुल अलग नहीं हो सकता, जहां बातचीत एक टेक्स्ट के आधार पर होती है. इसलिए, हम सह-अध्यक्षों से अपील करते हैं कि वे एक टेक्स्ट बनाने में लीड लें, जिसमें स्पष्ट तौर पर तय माइलस्टोन और टाइमलाइन हों.”

केवल स्थायी सदस्यता ही एकमात्र विकल्प: पी हरीश

पी. हरीश ने कहा कि स्थायी सदस्यता के विस्तार के लिए भारत की निरंतर वकालत का उद्देश्य सुरक्षा परिषद में अधिक संतुलन और समानता लाना तथा पी5 के एकाधिकार को संतुलित करना है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था अब भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती है. उन्होंने कहा कि जहां महासभा संयुक्त राष्ट्र के वास्तविक लोकतांत्रिक सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं सुरक्षा परिषद अपनी मूल संरचना और कार्यप्रणाली के कारण उससे मौलिक रूप से अलग है. उन्होंने कहा, “चार्टर की मौलिक संरचना के कारण, संयुक्त राष्ट्र महासभा के विपरीत, राज्यों की संप्रभु समानता का सिद्धांत सुरक्षा परिषद में पूर्ण रूप से लागू नहीं होता.”

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आईजीएन के सह-अध्यक्षों द्वारा तैयार किए गए तथाकथित “एलिमेंट्स पेपर” की आलोचना करते हुए हरीश ने कहा कि यह दस्तावेज विभिन्न विचारों को समेकित रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है, लेकिन इसमें स्थायी सदस्यता की अवधारणा पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई गई है.

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उन्होंने संकेत दिया कि ऐसा दृष्टिकोण सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय उसे लंबा खींच सकता है. उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश नहीं है.” उन्होंने कहा, “आर्टिकल 23 साफ तौर पर यूएनएससी सदस्यों को दो कैटेगरी में बांटता है: स्थायी और अस्थायी. इसलिए, स्थायी सीट की परिभाषा को और विस्तार में बताने की जरूरत नहीं है.”

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