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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की हाई-लेवल मीटिंग से पहले ट्रंप की बड़ी चेतावनी, कहा- परमाणु हथियार खत्म होंगे या…
दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन बयानबाज़ी और तनाव इसे मुश्किल बना रहे हैं. ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जल्द खुलने और परमाणु हथियारों पर सख्त रुख की बात कही है, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है.
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अमेरिका और ईरान के बीच भले ही अभी दो हफ्ते युद्धविराम लागू हो लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव अब भी जारी है. इस बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थायी शांति समझौते के लिए अमेरिका और ईरान के डेलीगेशन की होने वाली आमने-सामने बैठक पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है. हालांकि जमीन पर हालात और नेताओं के बयान इस मिशन को बेहद जटिल बना रहे हैं.
ट्रंप का परमाणु हथियारों पर सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस मीटिंग से पहले वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनके लिए सबसे अच्छा समझौता वही होगा जिसमें परमाणु हथियारों का पूरी तरह अंत हो. उन्होंने कहा कि यह 99 प्रतिशत समझौते जैसा है. ट्रंप ने आगे दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) बहुत जल्द अपने आप खुल जाएगा और वैश्विक ऊर्जा संकट में राहत मिलेगी. उनके अनुसार अमेरिका की रणनीति क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदलने की दिशा में है.
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नए रीसेट की ओर अमेरिका की रणनीति
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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि हम एक नए रीसेट की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी जहाजों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग निर्णायक रूप से किया जाएगा. उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर WORLD’S MOST POWERFUL RESET लिखा पोस्ट भी चर्चा में है.
इस्लामाबाद में आमने-सामने की कूटनीति
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दूसरी ओर ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी बातचीत के लिए क्षेत्र में पहुंच रहे हैं. दोनों देशों के बीच यह वार्ता अब मेक या ब्रेक स्थिति में पहुंच चुकी है जहां हर बयान महत्वपूर्ण हो गया है. शहबाज शरीफ ने कहा कि अस्थायी युद्धविराम के बाद अब असली चुनौती स्थायी शांति की है. उन्होंने इस स्थिति को बेहद संवेदनशील बताया और कहा कि क्षेत्र में स्थिरता के बिना विकास संभव नहीं है.
ईरान की शर्तें
ईरान ने शर्त रखी है कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब लेबनान में इजराइली हमले रुकें और उसकी फ्रीज की गई संपत्तियां वापस दी जाएं. वहीं जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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लेबनान में बढ़ती हिंसा
इस बीच लेबनान में हिंसा लगातार बढ़ रही है जहां हालिया हमलों में 357 लोगों की मौत हो चुकी है और 1200 से अधिक लोग घायल हुए हैं. यह स्थिति वार्ता पर दबाव बढ़ा रही है. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि ईरान की क्षमता को काफी हद तक नुकसान पहुंचा है और हजारों ठिकानों को निशाना बनाया गया है. हालांकि ACLED जैसे स्वतंत्र समूहों का कहना है कि ईरानी हमलों की क्षमता अभी भी बनी हुई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं है.
वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल
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वैश्विक ऊर्जा बाजारों में इस घटनाक्रम का सीधा असर देखा जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ेगा. कूटनीतिक जानकारों के अनुसार इस वार्ता में सबसे बड़ी चुनौती विश्वास की कमी है. एक तरफ अमेरिका कड़े रुख पर है जबकि ईरान अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है. इस स्थिति ने बातचीत को बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंचा दिया है जहां किसी भी छोटी गलती से पूरा समझौता टूट सकता है.
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बताते चलें कि इस्लामाबाद में मौजूद राजनयिक सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है. क्षेत्रीय देशों की नजरें भी इस वार्ता पर टिकी हैं क्योंकि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह प्रयास शांति की दिशा में जाता है या फिर एक और बड़े तनाव की शुरुआत बनता है.