Advertisement
रूस से तेल खरीदना पड़ेगा भारी! क्या भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? अमेरिका के नए बिल ने बढ़ाई चिंता
America Tariff: यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो भारत समेत कुछ अन्य देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने का रास्ता खुल सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत अब भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है.
Advertisement
America Tariff: अमेरिका से आई एक बड़ी खबर ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े एक अहम प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी है. अगर यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो भारत समेत कुछ अन्य देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने का रास्ता खुल सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत अब भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है. ऐसे में इस फैसले का असर सिर्फ भारत -अमेरिका व्यापार पर ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों पर भी पड़ा सकता है.
आखिर क्या है नया प्रतिबंध बिल?
अमेरिकी सीनेट में पास हुए इस बिल का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर दबाव महसूस करे. यह बिल दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के अमेरिका दौरे के दौरान इस पर मतदान हुआ और इसे भारी बहुमत से मंजूरी मिल गई. बिल के समर्थन मे 86 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 12 सांसद इसके विरोध में रहे. इस बिल के तहत सिर्फ रूस के अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि उन देशो पर भी कड़े आर्थिक कदम उठाने की बात कही गई है जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखे हुए हैं. इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं.
Advertisement
Advertisement
भारत क्यों आया अमेरिका के निशाने पर?
भारत इस समय रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है. चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है. पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक हालात ऐसे बने कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल पर पहले से ज्यादा निर्भर होना पड़ा.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग प्रभावित होने की वजह से खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में दिक्कत आई. पहले भारत अपने कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी इलाके से खरीदता था, लेकिन हालात बदलने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने सस्ते और आसानी से उपलब्ध रूसी कच्चे तेल की ओर रुख किया. यही वजह है कि अब अमेरिका इस मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.
Advertisement
100 फीसदी टैरिफ का क्या मतलब है?
अगर अमेरिका इस बिल के तहत भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो भारतीय सामान अमेरिका में पहले की तुलना में काफी महंगे हो जाएंगे. इससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है. इसका असर कई उद्योगों, निर्यात कारोबार और निवेश पर भी पड़ सकता है.
हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि भारत पर तुरंत इतना बड़ा टैरिफ लगाया जाएगा. लेकिन इस बिल के पास होने से ऐसा करने का रास्ता जरूर खुल गया है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी पड़ सकता है असर
Advertisement
भारत और अमेरिका इस समय एक बड़ी व्यापारिक डील पर बातचीत कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच कई दौर की चर्चा भी हो चुकी है. लेकिन अगर अमेरिका भारत पर नए टैरिफ लागू करता है, तो इन बातचीतों पर असर पड़ सकता है. इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं, इसलिए किसी भी बड़े फैसले से पहले बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है.
पहले भी लगा चुका है अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात की हो. इससे पहले भी अमेरिका ने रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. उस समय भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गया था. इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत भी प्रभावित हुई थी. बाद में जब वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया और कई देशों को तेल की कमी का सामना करना पड़ा, तब अमेरिका ने कुछ राहत देते हुए रूसी तेल खरीदने को लेकर छूट दी. इसके बाद भारत ने फिर से बड़े पैमाने पर रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया.
Advertisement
रूस से लगातार बढ़ी भारत की तेल खरीद
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने पिछले कुछ समय में रूस से तेल खरीद में लगातार बढ़ोतरी की है. जून 2026 में भारतीय आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. इससे भारत को अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल मिला, जबकि रूस को भी अपने तेल निर्यात से बड़ी आमदनी हुई. यही बढ़ती खरीद अब अमेरिका की नजर में सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है. अमेरिका चाहता है कि रूस की ऊर्जा बिक्री कम हो ताकि उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके.
बंधुआ मजदूरी को लेकर भी लगाया था शुल्क
Advertisement
रूस से जुड़े विवाद के अलावा अमेरिका ने पहले भारत समेत कई देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. यह कदम उन वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए उठाया गया था जिनके उत्पादन में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी का इस्तेमाल होता है.
हालांकि, भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव किए, जिसके बाद अमेरिका ने प्रस्तावित ज्यादा शुल्क को घटाकर 10 फीसदी कर दिया. इसके बावजूद भारत उन देशों की सूची में बना हुआ है जिन पर अमेरिका विशेष व्यापारिक निगरानी रख रहा है.
आगे क्या हो सकता है?
यह भी पढ़ें
अब सबकी नजर अमेरिका के अगले कदम पर है. अगर यह प्रतिबंध कानून पूरी तरह लागू होता है और भारत पर नए टैरिफ लगाए जाते हैं, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापार, निवेश और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ सकता है. वही दूसरी ओर भारत के सामने भी चुनौती होगी कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाए. आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है.