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पूछ रहा अमेरिका- क्या ट्रंप पर भारी पड़ गए मोजतबा खामेनेई? सीजफायर पर डील को बताया ‘सरेंडर’

ईरान के साथ 107 दिन की जंग के बाद आखिरकार अमेरिका को पीछे हटना पड़ा. कई शर्तों के साथ दोनों के बीच पीस डील होने जा रही है. जिसे अमेरिकी सांसदों ने सरेंडर करार दिया.

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15 Jun 2026
( Updated: 15 Jun 2026
01:31 PM )
पूछ रहा अमेरिका- क्या ट्रंप पर भारी पड़ गए मोजतबा खामेनेई? सीजफायर पर डील को बताया ‘सरेंडर’
Source- IANS
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर ईरान संग पीस डील होने का ऐलान किया. ईरान ने भी MoU को अंतिम रूप दिए जाने पर बयान जारी किया. इसके बाद दुनिया ने राहत की सांस ली है.

इस बीच अमेरिकी सांसद स्वागत तो कर रहे हैं लेकिन तंज भी कस रहे हैं. सांसद क्रिस मर्फी ने इसे ‘सरेंडर’ करार दिया है. हालांकि डेमोक्रेट्स ईरान के साथ हुए समझौते का स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह युद्ध अनावश्यक था और यह समझौता केवल स्थिति को वहीं वापस ले जाता है जहां से शुरुआत हुई थी. 

अमेरिका को कमजोर कर रहा युद्ध 

डेमोक्रेट सांसद क्रिस मर्फी ने एक्स पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा और दो अहम बातें कहीं. उन्होंने कहा, ‘अगर ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता होता है, तो वह तेहरान के सामने ‘सरेंडर’ जैसा लगेगा. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे समझौते का स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि युद्ध जारी रहने से अमेरिका और कमजोर होगा.’

मर्फी ने कहा कि मौजूदा हालात में लंबी जंग अमेरिका के हितों को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. इसलिए अगर समझौते के जरिए संघर्ष खत्म होता है, तो यह विकल्प युद्ध जारी रखने से बेहतर होगा. 

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मर्फी ने यह भी कहा कि ईरान की ओर से एकमात्र रियायत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की थी, जबकि यह मार्ग संघर्ष से पहले भी खुला हुआ था. उन्होंने तर्क दिया कि ईरान पहले से ही जेसीपीओए के तहत परमाणु हथियार विकसित न करने के लिए प्रतिबद्ध था जो एक ऐसा समझौता था जिसे बाद में ट्रंप ने छोड़ दिया था. 

ट्रंप ने पोस्ट में क्या बताया? 

दरअसल, ट्रंप ने अपनी पोस्ट में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही थी. उन्होंने लिखा, ‘दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो. तेल को बहने दो.’

वहीं, डेलावेयर के सीनेटर क्रिस कून्स ने कहा कि यह समझौता स्थिति को ‘सही दिशा’ में ले जाता है, लेकिन अभी भी कई सवाल बाकी हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते की अलग-अलग व्याख्या जोखिम पैदा कर सकती हैं. 

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कून्स ने एक्स पर कहा, ‘यह तथ्य कि हमने अभी तक समझौते का कोई लिखित पाठ नहीं देखा है, जबकि ट्रंप और ईरानी नेता एक बार फिर इस बात पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं कि क्या सहमति बनी है, इस बात को रेखांकित करता है कि हमें यह समझौता तुरंत देखना चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘युद्धविराम और वार्ता एक सकारात्मक विकास हैं, लेकिन अब तक इस पसंद के युद्ध ने केवल अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों को असुरक्षित किया है और कई महत्वपूर्ण सवालों को बिना जवाब या अनसुलझा छोड़ दिया है.’ इससे पहले अमेरिकी सांसद सेथ मॉल्टन ने भी इसे ट्रंप का संपूर्ण सरेंडर करार दिया था. 

यह भी पढ़ें- अमेरिका-ईरान समझौते में क्या-क्या हुआ तय? 14 पॉइंट्स में समझें पूरी डील, जानें किन मुद्दों पर अब भी फंसी है बात

वहीं, इस जंग ने अमेरिका की भी आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है. जिससे अमेरिकियों में रोष है. एक तरफ इस समझौते से राहत मिलेगी तो दूसरी ओर सवाल भी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई के आगे ट्रंप सच में हार मान गए हैं.? 

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