बच्चों की देखभाल के लिए मिलेगा पैसा, नए लेबर नियमों में कर्मचारियों को बड़ा फायदा
Crench Allowance: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों को कई नई सुविधाएं मिलने वाली हैं. इन्हीं में से एक हैं क्रेच अलाउंस Crench Allowance जो छोटे बच्चो की देखभाल में होने वाले खर्च को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया हैं.
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Crench Allowance: देश के कामकाजी महिलाओं और सिंगल पेरेंट कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है..केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड (Labor Code) के तहत कर्मचारियों को कई नई सुविधाएं मिलने वाली हैं. इन्हीं में से एक हैं क्रेच अलाउंस (Crench Allowance), जो छोटे बच्चो की देखभाल में होने वाले खर्च को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया हैं. यह नियम खासकर उन कामकाजी महिलाओं, सिंगल पैरेंट्स, विधवा और विधुर कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया हैं , जिन्हें नौकरी के साथ -साथ अपने छोटे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है.
आज के समय में बच्चों की देखभाल पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे मे सरकार का यह कदम कई परिवारों के लिए आर्थिक मदद साबित हो सकता है...किसी कर्मचारी को उसके कार्यस्थल पर क्रेच की सुविधा नहीं मिलती है, तो अब उसे हर महीने बच्चों की देखभाल के लिए अलग से भत्ता दिया जाएगा.
क्या है क्रेच अलाउंस का नया नियम?
नए लेबर कोड के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, यदि किसी महिला कर्मचारी, विधुर या सिंगल पैरेंट के 6 साल से कम उम्र के बच्चे हैं और कंपनी की ओर से क्रेच सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो ऐसे कर्मचारियों को हर महीने क्रेच अलाउंस दिया जाएगा.
सरकार ने इसकी न्यूनतम राशि 500 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह तय की है. यानी अगर कर्मचारी पात्रता की शर्तें पूरी करता है, तो उसे बच्चों की देखभाल के लिए हर महीने अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिल सकती है. भविष्य में सरकार जरूरत के हिसाब से इस राशि में बदलाव भी कर सकती है.
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कितने बच्चों के लिए मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ अधिकतम दो बच्चों तक दिया जाएगा. यानी कर्मचारी अपने दो छोटे बच्चों के लिए क्रेच अलाउंस प्राप्त कर सकता है. हालांकि सरकार ने इसमें एक विशेष छूट भी दी है.
अगर किसी कर्मचारी की दूसरी डिलीवरी में जुड़वा बच्चे या एक से अधिक बच्चे जन्म लेते हैं और कुल बच्चों की संख्या दो से ज्यादा हो जाती है, तब भी वह इस सुविधा का लाभ लेने का हकदार रहेगा. इससे ऐसे परिवारों को अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी, जिन पर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी अधिक होती है.
पुराने नियमों से क्या बदला?
पहले के श्रम कानूनों के तहत कई कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य था. लेकिन नए नियमों में कंपनियों को थोड़ा लचीलापन दिया गया है.
अब कंपनियां दो विकल्पों में से किसी एक को चुन सकती हैं. पहला, वे अपने कर्मचारियों के लिए क्रेच सुविधा उपलब्ध कराएं. दूसरा, अगर वे क्रेच नहीं बनाती हैं तो पात्र कर्मचारियों को हर महीने क्रेच अलाउंस दे. इससे कंपनियों को सुविधा मिलेगी और कर्मचारियों को भी बच्चों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त होगी.
किन कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा?
यह नियम फिलहाल सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा. इसे Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Central Rules, 2026 के तहत लागू किया गया है.
इन नियमों का लाभ रेलवे, खदानों, तेल और गैस क्षेत्र, बड़े बंदरगाहों, एयर ट्रांसपोर्ट सेवाओं, टेलीकॉम सेक्टर, बैंकिंग और बीमा कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) तथा केंद्र सरकार के अधीन आने वाले स्वायत्त संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा.
इन क्षेत्रों में कार्यरत पात्र कर्मचारी अपनी कंपनी से यह जानकारी ले सकते हैं कि उन्हें क्रेच सुविधा दी जाएगी या फिर क्रेच अलाउंस का भुगतान किया जाएगा.
कुछ कर्मचारियों को करना पड़ सकता है इंतजार
श्रम कानून विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियों को केंद्र और राज्य सरकारों के अलग-अलग लेबर कोड नियमों का पालन करना होगा. ऐसे में कुछ जगहों पर इन नियमों को लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है.
हालांकि, धीरे-धीरे जब सभी संस्थान नए नियमों को पूरी तरह अपनाएंगे, तब ज्यादा कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने लगेगा. इसलिए जिन कर्मचारियों को अभी यह सुविधा नहीं मिल रही है, उन्हें कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है.
कामकाजी परिवारों के लिए राहत भरा कदम
बढ़ती महंगाई और बच्चों की देखभाल से जुड़े खर्चों को देखते हुए यह फैसला कामकाजी माता-पिता के लिए राहत लेकर आया है. नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. ऐसे में क्रेच अलाउंस जैसी सुविधा न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि कर्मचारियों को मानसिक रूप से भी सुकून प्रदान करेगी.
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सरकार का यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की जरूरतों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी महत्व दिया जा रहा है. आने वाले समय में यह सुविधा हजारों परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है और बच्चों की बेहतर देखभाल में भी मदद करेगी.