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"हाथ-पैर काट दिए जाएं तो लोग कानून मानेंगे..." रेप आरोपी की जमानत पर कर्नाटक HC की टिप्पणी

Karnataka High Court: देश में अपराध के बढ़ते मामलों और कानून की गंभीरता को न मानने के हालातों पर कर्नाटका हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. एक रेप आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदलात ने कहा कि लोग लोकतंत्र का फायदा उठाकर कानून को हलके में ले रहे हैं.

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02 Jun 2026
( Updated: 02 Jun 2026
08:43 AM )
"हाथ-पैर काट दिए जाएं तो लोग कानून मानेंगे..." रेप आरोपी की जमानत पर कर्नाटक HC की टिप्पणी
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High Court: देश में अपराध के बढ़ते मामलों और कानून की गंभीरता को न मानने के हालातों पर कर्नाटका हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. एक रेप आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदलात ने कहा कि लोग लोकतंत्र का फायदा उठाकर कानून को हलके में ले रहे हैं. अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर खाड़ी देशों की तरह अपराधियों के हाथ -पैर काटने जैसी सजा दी जाए, तो शायद लोग कानून का पालन करना सीखें. जस्टिस आर. नटराज की बेंच ने कहा कि कानून अब प्रभावहीन हो गया हैं, क्योंकि अपराधियों से सख्ती से निपटा नहीं जा रहा. उनका मानना हैं कि हमारे देश में लोकतंत्र होने की वजह से लोग कानून को आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि सख्त कार्यवाई से ही समझ आएगी कि अपराध की कीमत चुकानी पड़ती हैं. 

'नमक खाया है तो पानी पीना पड़ेगा' - जज की सख्त टिप्पणी

अदालत ने आरोपी गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया. जज ने कहा, "अगर आपने नमक खाया है, तो पानी पीना ही पड़ेगा. उसे चार-पांच दिन और जेल में रहने दीजिए. उसे जेल की आदत पड़ने दें.. कौन जानता है, अगर उसे सजा हुई तो वापस वहीं जाना पड़ सकता है." साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून को तय की.

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क्या है पूरा मामला?

23 वर्षीय गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का छात्र है. उसके खिलाफ आरोप है कि उसने 12 सितंबर 2023 को अपनी क्लासमेट लड़की के साथ उसके फ्लैट में उसकी इच्छा के खिलाफ यौन उत्पीड़न किया. पीड़िता पहले गहरे सदमे और डिप्रेशन में चली गई और अपने इलाज के लिए केएमसी मणिपाल गई. इसके बाद उसने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और उडुपी महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. मामला आईपीसी की धारा 375(ए) और 376 के तहत दर्ज किया गया.

बचाव पक्ष की दलील

अभियुक्त के बचाव में वकील अयानतिका मंडल ने तर्क दिया कि आरोपी पिछले दो महीने से जेल में है और उसने कोई अपराध नहीं किया. साथ ही उन्होंने कहा कि आरोप करीब तीन साल पुरानी घटना से जुड़े हैं और अगर आरोपी को और जेल में रखा गया, तो इससे उसका पेशेवर भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो सकता है.
हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल किसी भी राहत को मंजूरी नहीं दी.

हाईकोर्ट का संदेश

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कोर्ट का संदेश साफ है: अपराध की सजा से बचने की कोशिश करने वाले लोगों के लिए कानून अब भी सख्त है. जज नटराज ने कहा कि कानून को हल्के में लेने की वजह से ही अपराधियों को हिम्मत मिल रही है. इस मामले में अदालत ने सख्ती दिखाते हुए बताया कि आरोपी को अभी और जेल में रहना होगा.

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