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किरायेदारों के लिए जरूरी खबर! आपदा में मकान मालिक नहीं वसूल सकता किराया, जानें कानून
Rental Law: इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में न तो मकान मालिक के अधिकारों का नुकसान हो और न ही किरायेदार को बेवजह परेशानी झेलनी पड़े.
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Rental Law: बाढ़, भूकंप, तूफ़ान, आगजनी या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे ज्यादा नुकसान सिर्फ मकान मालिक का ही नहीं होता, बल्कि किराये पर रहने वाले लोगों की परेशानी भी अचानक बढ़ जाती है. कई बार घर इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि उसमे रहना सुरक्षित नहीं रहता. ऐसे में किरायेदारों के मन में कई सवाल आते है, क्या अब भी किराया देना होगा? क्या मकान खाली करना पड़ेगा? सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिलेगा या नहीं? और अगर घर रहने लायक नहीं है, तो क्या रेंट एग्रीमेंट तुरंत खत्म किया जा सकता है? ऐसी परिस्थितियों के लिए भारत में कुछ कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जो मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय करते हैं...
कौन-कौन से कानून देते हैं सुरक्षा?
प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में मुख्य रूप से दो कानून अहम भूमिका निभाते हैं. पहला है ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882, जो देश के अधिकांश हिस्सों में लागू होता है. दूसरा है मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021, जिसे कुछ राज्यों ने लागू किया है.
इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में न तो मकान मालिक के अधिकारों का नुकसान हो और न ही किरायेदार को बेवजह परेशानी झेलनी पड़े.
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क्या आपदा आते ही रेंट एग्रीमेंट खत्म हो जाता है?
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बहुत से लोगों को लगता है कि अगर घर बाढ़ या आग की वजह से रहने लायक नहीं बचा, तो रेंट एग्रीमेंट अपने आप खत्म हो जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है.
कानून के अनुसार, अगर किसी प्राकृतिक आपदा के कारण मकान पूरी तरह या काफी हद तक खराब हो जाता है और उसमें रहना संभव नहीं रहता, तो किरायेदार के पास यह अधिकार होता है कि वह रेंट एग्रीमेंट खत्म कर सकता है. लेकिन यह फैसला पूरी तरह किरायेदार का होता है. अगर वह चाहे तो घर छोड़ सकता है और अगर वह उसी घर में रहना जारी रखता है, तो उसे पहले की तरह किराया देना होगा.
हालांकि यह नियम तभी लागू होता है जब नुकसान गंभीर हो. अगर केवल मामूली मरम्मत की जरूरत है, तो सिर्फ उसी आधार पर रेंट एग्रीमेंट खत्म नहीं किया जा सकता.
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क्या रहने लायक घर न होने पर भी किराया देना होगा?
मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 के तहत किरायेदारों को और ज्यादा राहत दी गई है. अगर किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से मकान रहने योग्य नहीं रह जाता, तो मकान मालिक तब तक किराया नहीं मांग सकता, जब तक वह घर की मरम्मत कराकर उसे दोबारा रहने लायक नहीं बना देता. यानी अगर घर सुरक्षित नहीं है और उसमें रहना संभव नहीं है, तो उस अवधि का किराया वसूलना उचित नहीं माना जाएगा.
सिक्योरिटी डिपॉजिट कब मिलेगा वापस?
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अगर मकान पूरी तरह खराब हो चुका है या मकान मालिक उसकी मरम्मत नहीं करवा सकता, तो किरायेदार को अपना सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस पाने का अधिकार है. नियमों के मुताबिक, रेंट एग्रीमेंट खत्म होने और तय नोटिस अवधि पूरी होने के बाद 15 दिनों के भीतर मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट और पहले से लिया गया एडवांस किराया वापस करना होगा. अगर किरायेदार का कोई बकाया किराया या दूसरी कानूनी देनदारी है, तो उतनी राशि काटी जा सकती है.
अगर एग्रीमेंट बीच में खत्म हो जाए तो क्या होगा?
कई बार ऐसा होता है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान ही किरायेदार का रेंट एग्रीमेंट खत्म होने वाला होता है. ऐसी स्थिति में मॉडल टेनेंसी एक्ट किरायेदार को राहत देता है. अगर किरायेदार अनुरोध करता है, तो मकान मालिक को उसे आपदा खत्म होने के बाद भी एक महीने तक उसी घर में रहने की अनुमति देनी होगी. इस दौरान पहले जैसी शर्तें और किराया ही लागू रहेगा.
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मरम्मत के लिए क्या पहले नोटिस देना जरूरी है?
सामान्य परिस्थितियों में मकान मालिक को किरायेदार के घर में प्रवेश करने से पहले कम से कम 24 घंटे पहले सूचना देना जरूरी होता है.
लेकिन अगर बाढ़, आग, भूकंप या किसी दूसरी आपात स्थिति में तुरंत मरम्मत की जरूरत हो, तो मकान मालिक बिना पहले से नोटिस दिए भी घर में प्रवेश कर सकता है. इसका उद्देश्य नुकसान को और बढ़ने से रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है.
अपने अधिकार जानना है सबसे जरूरी
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प्राकृतिक आपदा किसी के साथ भी हो सकती है. ऐसे समय में घबराने के बजाय अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है. अगर आप किराये के घर में रहते हैं, तो अपने रेंट एग्रीमेंट की शर्तों को भी ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़ने पर संबंधित कानूनों की मदद लें.
सही जानकारी होने से न केवल आर्थिक नुकसान कम किया जा सकता है, बल्कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच होने वाले विवादों से भी आसानी से बचा जा सकता है.