डांस बार में तोड़फोड़ मचाने वाले MNS कार्यकर्ताओं की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने किया 15 पर केस दर्ज

MNS के 15 कार्यकर्ताओं के खिलाफ पनवेल में एक डांस बार में तोड़फोड़ करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. हालांकि इस कार्रवाई की MNS ने निंदा की है. उन्होंने इसे "प्रतीकात्मक विरोध" बताया है.

डांस बार में तोड़फोड़ मचाने वाले MNS कार्यकर्ताओं की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने किया 15 पर केस दर्ज
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महाराष्ट्र में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी की खबरें आए दिन सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं. अब इसी बीच MNS कार्यकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल MNS के 15 कार्यकर्ताओं के खिलाफ पनवेल में एक डांस बार में तोड़फोड़ करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. यह घटना पार्टी प्रमुख राज ठाकरे द्वारा एक सार्वजनिक भाषण के दौरान रायगढ़ जिले में अवैध बारों पर तीखा हमला करने के कुछ ही घंटों बाद हुई थी. 

मामला दर्ज करने की जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कुछ लोग शनिवार देर रात पनवेल के बाहरी इलाके में ‘नाइट राइडर्स बार’ में घुसते हुए, वहां फर्नीचर में तोड़फोड़ करते हुए, शराब की बोतलें तोड़ते हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए दिखाई दे रहे हैं. 

राज ठाकरे ने क्या कहा था?
हाल ही में पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने रायगढ़ जिले में एक रैली के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर डांस बार चलाने को "अपमानजनक" बताया था. उन्होंने कहा था कि यह महाराज के आदर्शों के खिलाफ है और महाराष्ट्र की संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश है. इस बयान के कुछ ही घंटों बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने विभिन्न डांस बार्स में जाकर तोड़फोड़ की.

MNS इसे प्रतीकात्मक विरोध बता रही
इस बीच, MNS नेता संदीप देशपांडे ने बार में तोड़फोड़ की घटना का बचाव करते हुए इसे "प्रतीकात्मक विरोध" बताया है. उन्होंने कहा, "सरकार को इन अवैध बारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. क्या वे बार चला रहे हैं या उसे बचा रहे हैं? अगर वे इन्हें बंद नहीं करेंगे, तो लोग कार्रवाई करेंगे." 

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पहले भी सामने आ चुकी है घटनाएं
राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) एक बार फिर विवादों में घिर गई है. पुलिस ने कार्यक्रताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. हालांकि, इस कार्रवाई की निंदा भी हो रही है. कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे कानून व्यवस्था के खिलाफ बताया है और कहा है कि कोई भी संगठन खुद कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता.
बता दें कि MNS की छवि एक क्षेत्रीय आक्रामक पार्टी की बनती जा रही है, जो हर बार विवादास्पद तरीकों से ही अपने मुद्दे उठाती है. ऐसे में पार्टी के इस कदम को लेकर एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राजनीतिक विरोध जताने का यह तरीका उचित है?

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