CM बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी का पहला टेस्ट... नंदीग्राम सीट बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई, कांग्रेस को मिला 'ममता' का साथ
नंदीग्राम उपचुनाव सुवेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन दिया गया, लेकिन बाद में उनकी गिरफ्तारी हो गई. वहीं, सुवेंदु ने अपने दिवंगत पीए चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है.
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पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के लिए खास राजनीतिक महत्व रखता है. यह उनकी सरकार बनने के बाद पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है. चुनाव से पहले यहां जिस तरह घटनाक्रम तेजी से बदला है, उसने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान होना है, जबकि 9 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे.
ममता के उम्मीदवार ने वापस लिया नामांकन
नंदीग्राम में ममता बनर्जी के खेमे ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया. यह फैसला सुवेंदु अधिकारी से उनकी मुलाकात के बाद सामने आया. नामांकन वापस लेने की वजह उन्होंने सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं की है. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया. कुछ ही समय बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आई. उन्हें 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है. कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के तहत होने की बात सामने आई है.
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सुवेंदु ने खेला भावनात्मक दांव
बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. चंद्रनाथ रथ की 6 मई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है. बीजेपी का यह फैसला चुनावी मुकाबले में एक भावनात्मक पहलू भी जोड़ता है.
सुवेंदु के लिए क्यों खास है नंदीग्राम?
नंदीग्राम सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा का अहम केंद्र रहा है. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया था. बाद में दोनों नेताओं के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए. 2021 में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दिया, जिसके चलते यहां उपचुनाव जरूरी हुआ.
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बहरहाल, नंदीग्राम के साथ रेजीनगर में भी उपचुनाव होने हैं. ऐसे में दोनों सीटों के नतीजे राज्य की नई राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं. नंदीग्राम में उम्मीदवारों के बदलते समीकरण, पुराने राजनीतिक रिश्ते और हालिया घटनाक्रम ने मुकाबले को पहले ही चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब 6 अक्टूबर को मतदाता किस मुद्दे और किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला सुनाते हैं, इसका जवाब 9 अक्टूबर को मतगणना के साथ सामने आएगा.