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Nepal Flood: 'पानी इतनी तेजी से आया कि सभी को जान बचाने...' मौत को करीब से देखकर लौटे मजदूरों ने सुनाई आपबीती

नियम मियां ने बताया कि हेलीकॉप्टर से उन्हें झापड़ी बेसी से झुमचे ले जाया गया. वहां कुछ समय रुकने के बाद सेना के कैंप भटार पहुंचाया गया. अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का भरोसा दिया. इसके बाद वे काठमांडू पहुंचे और रात रिश्तेदार के यहां बिताई. अगले दिन वाहन से बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण के लिए रवाना हुए.

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29 Aug 2026
( Updated: 29 Aug 2026
06:40 PM )
Nepal Flood: 'पानी इतनी तेजी से आया कि सभी को जान बचाने...' मौत को करीब से देखकर लौटे मजदूरों ने सुनाई आपबीती
Image Credit: IANS Video Grab
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जल प्रलय के बीच फंसे पश्चिम चंपारण के मजदूरों का एक दल आखिरकार सुरक्षित घर लौट आया. करीब दो दिनों के सफर के बाद शुक्रवार देर शाम मजदूरों के घर पहुंचते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े. हालांकि, इस राहत के बीच परिवारों की चिंता खत्म नहीं हुई है. उनके साथ काम करने वाले तीन मजदूर अब भी लापता हैं. परिजन लगातार उनकी तलाश और सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं. 

नेपाल की बाढ़ से बचकर पश्चिम चंपारण लौटे मजदूर

घर लौटे मजदूरों ने नेपाल की तबाही का भयावह मंजर बताया. उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. एक मजदूर ने बताया कि पानी करीब 20 फीट तक ऊपर पहुंच गया था.

मजदूरों ने सुनाई आपबीती

जबरुल आलम ने आईएएनएस को बताया कि वह कुछ साथियों के साथ सो रहे थे. अचानक तेज आवाज सुनाई दी और लोगों ने बाहर निकलकर देखा तो बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था. उन्होंने बताया कि दवा लेने गए एक साथी के लौटने के बाद सभी को खतरे का अंदाजा हुआ. कुछ लोग उन्हें आवाज देकर ऊपर की ओर भागने के लिए कहने लगे.

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जबरुल ने बताया कि वे चप्पल और कपड़े तक ठीक से पहन नहीं पाए और जान बचाने के लिए भागने लगे. पानी कुछ कम होने के करीब एक घंटे बाद वे अपने लापता साथियों को खोजने निकले, लेकिन तीनों का कोई पता नहीं चला. उन्होंने आसपास काफी तलाश की और बाद में एक स्कूल में रात गुजारी. सुबह इलाके में कई शव दिखाई दिए, लेकिन उनके साथियों का कोई सुराग नहीं मिला.

सलमान आलम ने बताया कि बाढ़ आने से पहले कुछ साथी घूमने गए थे, जबकि अन्य काम पर गए थे. उनके पिता को दवा की जरूरत थी और एक साथी दवा लेने गया था. रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक तेज आवाजें सुनाई देने लगीं. बाहर निकलने पर धुएं और पानी का भयावह मंजर दिखाई दिया. पानी बेहद तेजी से आ रहा था. इसके बाद वे अपने साथियों को लेकर ऊंचाई की ओर भागे. बाद में अपने रिश्तेदारों और साथियों को खोजने के लिए नीचे गए, लेकिन वहां घर और सामान तक बह चुका था. किसी का पता नहीं चला. बाद में सेना के जवान उन्हें वहां से निकालकर स्कूल ले गए, जहां उन्हें भोजन दिया गया. अगले दिन हेलीकॉप्टर से उन्हें भटार ले जाया गया और वहां से काठमांडू पहुंचाया गया. काठमांडू से उन्होंने टाटा सूमो रिजर्व की और बीरगंज होते हुए घर लौटे.

“इससे पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी थी”

नियम मियां ने बताया कि नेपाल में उन्होंने इससे पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी थी. उनके समूह में कई मजदूर थे, जिनमें से तीन लोग लापता हो गए. उन्होंने बताया कि पानी इतनी तेजी से आया कि सभी को जान बचाने के लिए ऊंचे स्थान की ओर भागना पड़ा. बाढ़ का पानी लगभग 20 फीट तक ऊपर पहुंच गया था. पानी कम होने के बाद उन्होंने अपने साथियों को खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन भी तलाश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली.

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नियम मियां ने बताया कि हेलीकॉप्टर से उन्हें झापड़ी बेसी से झुमचे ले जाया गया. वहां कुछ समय रुकने के बाद सेना के कैंप भटार पहुंचाया गया. अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का भरोसा दिया. इसके बाद वे काठमांडू पहुंचे और रात रिश्तेदार के यहां बिताई. अगले दिन वाहन से बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण के लिए रवाना हुए.

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