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मान सरकार की सेहत स्कीम बनी कैंसर मरीजों का सहारा, 8,069 रोगियों के इलाज पर 20.22 करोड़ खर्च किए

भगवंत मान सरकार गुणवत्तापूर्ण कैंसर इलाज मुहैया करवा रही है. ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पंजाब सरकार ने 8,069 कैंसर मरीजों का कैशलेस इलाज करवाया है.

Image Source- IANS/CMO
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पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 8,069 कैंसर मरीज़ों के इलाज पर 20.22 करोड़ ख़र्च किए हैं. लाभार्थियों में आधे से अधिक मरीज़ 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हैं. जून महीने में सबसे अधिक मरीज़ों का उपचार किया गया.

कैंसर का पता चलना एक बेहद भयावह अनुभव होता है. कई परिवारों के लिए यह भय तब और गहरा हो जाता है, जब अगला सवाल केवल यह नहीं होता कि ‘क्या इस बीमारी का इलाज संभव है?’, बल्कि यह भी होता है कि “क्या हम इलाज का ख़र्च उठा पाएँगे?’ भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना इसी चिंता को दूर करने का प्रयास कर रही है. 

कैंसर मरीजों के इलाज के लिए सरकार ने कितना खर्च किया? 

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राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), आंकड़ों के अनुसार, 18 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8,069 कैंसर मरीज़ों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया, जिस पर सरकार ने कुल 20.22 करोड़ ख़र्च किए हैं. 

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इन आंकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें जीवन के सबसे कठिन दौर में महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं. जब इलाज में होने वाली हर देरी मरीज के जीवन पर भारी पड़ सकती है. आज कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा टार्गेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों ने मरीज़ों के स्वस्थ होने की संभावनाओं को पहले की तुलना में काफ़ी बढ़ा दिया है, लेकिन चिकित्सा में हुई यह प्रगति तभी सार्थक है, जब मरीज़ समय पर उपचार तक पहुंच सके. 

क्या कहते हैं आंकड़े? 

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लाभार्थियों की आयु से जुड़ा आंकड़ा भी एक महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने लाता है. सामान्यतः कैंसर को वृद्धावस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन योजना के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज़ हैं जो अपनी कार्यशील आयु में इस बीमारी से जूझ रहे हैं. योजना के तहत इलाज करवाने वाले 8,069 मरीज़ों में से 4,285 मरीज़ 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के थे, जो सबसे बड़ा वर्ग रहा. इसके अलावा 3,376 मरीज़ 60 वर्ष से अधिक आयु के, 399 मरीज़ 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के और 9 मरीज़ 17 वर्ष से कम आयु के थे. 

किसी भी परिवार के लिए कैंसर का इलाज अचानक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। इस बीमारी के उपचार में बार-बार अस्पताल जाना, महंगी चिकित्सा प्रक्रियाएँ तथा लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता होती है. कई बार बीमारी का इलाज संभव होने के बावजूद भी ख़र्च ही यह तय करता है कि मरीज़ कितनी जल्दी उपचार शुरू कर पाएगा. 

लोगों ने क्या कहा? 

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समाना निवासी दर्शन देवी ने भी इसी चिंता का सामना किया. बढ़ते दर्द के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी, लेकिन 4 से 5 लाख रुपये के अनुमानित ख़र्च ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मंज़ूरी मिलने के बाद उनकी कैंसर सर्जरी बिना किसी जेब से ख़र्च के संपन्न हुई. उनके लिए यह योजना केवल स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि इसने बीमारी की पहचान और समय पर उपचार के बीच खड़ी सबसे बड़ी बाधा इलाज के ख़र्च को दूर कर दिया. 

पंजाब में कैंसर उपचार के आंकड़े बताते हैं कि पूरे साल कैंसर के इलाज की जरूरत लगातार बनी रही. जनवरी में 842 मरीज़ों का इलाज हुआ, जो फ़रवरी में बढ़कर 1,080, मार्च में 1,175 और अप्रैल में 1,350 हो गया. मई में यह संख्या थोड़ी घटकर 1,275 रही, लेकिन जून में सर्वाधिक 1,468 मरीज़ों का उपचार किया गया. जुलाई के पहले 18 दिनों में ही 879 मरीज़ इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर चुके थे. 

कैंसर उपचार की बढ़ती आवश्यकता देश के सामने मौजूद एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती को भी दर्शाती है. इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया था और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है. बदलती जीवनशैली, बढ़ती आयु और बेहतर जांच सुविधाएं इस बढ़ते बोझ के प्रमुख कारणों में शामिल हैं. 

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हालांकि केवल आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते. कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसमें अक्सर समय ही उपचार के परिणाम तय करता है. अगर टेस्ट या इलाज में देरी हो जाए तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और इलाज ज्यादा जटिल और महंगा हो सकता है. ऐसे समय में पहले से मानसिक तनाव झेल रहे परिवारों के लिए इलाज का ख़र्च जुटाना एक अतिरिक्त संघर्ष बन जाता है.

कितने कैंसर मरीजों का इलाज हुआ? 

8 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री सेहत योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 2,68,274 लाभार्थी योजना के तहत उपचार प्राप्त कर चुके हैं. इस दौरान योजना के अंतर्गत कुल 5,31,386 उपचार मामले दर्ज किए गए हैं. 20 जुलाई 2026 तक योजना के अंतर्गत उपलब्ध करवाए गए उपचार का कुल मूल्य 950.35 करोड़ तक पहुंच चुका है.

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पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि भगवंत मान सरकार का उद्देश्य मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाई किसी भी मरीज़ के कैंसर उपचार में बाधा न बने. उन्होंने कहा, ‘कैंसर हमारे समय की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है. समय पर जांच और जल्द उपचार से मरीज़ों के स्वस्थ होने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से पात्र मरीज़ों को गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि उन्हें इलाज के ख़र्च की चिंता न करनी पड़े.’

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डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से अपील की कि वे शरीर में गांठ, बिना किसी कारण वज़न कम होना, असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक रहने वाली खांसी और मल-मूत्र की सामान्य प्रक्रिया में होने वाले बदलाव जैसे चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें.

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