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APEDA की मदद से दुबई पहुंचे झारखंड के आम्रपाली आम, आदिवासी किसानों की मेहनत लाई रंग

यह एक्सपोर्ट एपीडा की उन लगातार कोशिशों को दिखाता है, जिनका मकसद क्षमता निर्माण, क्वालिटी में सुधार और बाजार की सुविधा के जरिए एक्सपोर्ट के लिए तैयार किसान समूह बनाना है. मई में, इसने गुमला जिले के पालकोट इलाके में एक खास क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया था.

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07 Jul 2026
( Updated: 07 Jul 2026
06:36 PM )
APEDA की मदद से दुबई पहुंचे झारखंड के आम्रपाली आम, आदिवासी किसानों की मेहनत लाई रंग
Image Credits: Commerce Minister Goyal's X handle
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कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनियों से 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम खरीदकर दुबई भेजने में मदद की है. 

झारखंड का आम्रपाली आम दुबई पहुंचा

इस खेप को मेसर्स फेयर एक्सपोर्ट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने दुबई में लुलु स्टोर्स में रिटेल बिक्री के लिए एक्सपोर्ट किया. यह आदिवासी और महिलाओं के नेतृत्व वाले किसान समूहों से एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की दिशा में एक और अहम कदम है.

एक्सपोर्ट की इस खेप में प्रीमियम क्वालिटी के आम्रपाली आम शामिल थे. ये आम 'पलाश' झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी द्वारा प्रमोट की गई महिलाओं के नेतृत्व वाली तीन उत्पादक कंपनियों से लिए गए थे. इनकी खेप को 3 जुलाई को रवाना किया गया.

एक मीट्रिक टन आम गुमला जिले की एपीडा-रजिस्टर्ड एमवीएम बाघिमा पालकोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और राइडीह एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से लिए गए थे, जबकि बाकी एक मीट्रिक टन आम देवघर जिले की मोहनपुर आजीविका महिला किसान प्रोड्यूसर सोसायटी से लिए गए थे. ये बागान आदिवासी महिला किसानों ने 'बिरसा हरित ग्राम योजना' के तहत विकसित किए हैं. यह योजना मनरेगा के साथ मिलकर और झारखंड सरकार के सहयोग से लागू की गई है.

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आदिवासी किसानों की मेहनत का कमाल

इस एक्सपोर्ट से इसमें शामिल किसानों को काफी आर्थिक फायदा हुआ है. महिलाओं के नेतृत्व वाली एफपीसी के सदस्यों को स्थानीय बाजार की मौजूदा कीमतों की तुलना में लगभग 180 प्रतिशत अधिक रिटर्न मिला है. यह पहल दिखाती है कि एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंच किसानों की आय बढ़ाने में कितनी मददगार हो सकती है.

बयान में कहा गया है कि इसमें शामिल हर एफपीसी में 1,500 से ज्यादा शेयरहोल्डर हैं और ये सभी मिलकर 50,000 से ज्यादा किसान सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे इस पहल का फायदा किसानों के एक बड़े समुदाय तक पहुंचता है.

APEDA ने निर्यात में की मदद

यह एक्सपोर्ट एपीडा की उन लगातार कोशिशों को दिखाता है, जिनका मकसद क्षमता निर्माण, क्वालिटी में सुधार और बाजार की सुविधा के जरिए एक्सपोर्ट के लिए तैयार किसान समूह बनाना है. मई में, इसने गुमला जिले के पालकोट इलाके में एक खास क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया था.

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इसका मकसद आठ किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, फसल कटाई के बाद की हैंडलिंग और एक्सपोर्ट प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे प्रीमियम विदेशी बाजारों की जरूरतों को पूरा कर सकें.

बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम में कृषि, बागवानी, जेएसलीपीएस, जिला उद्योग केंद्र और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया. महिला उद्यमियों के बीच अपनी पहुंच को और मजबूत करते हुए, एपीडा के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 19 सितंबर, 2025 को देवघर जिले के देवीपुर ब्लॉक के बसवरिया गांव में महिला उद्यमियों और स्वयं-सहायता समूहों के लिए निर्यात-केंद्रित क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया.

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य एपीडा के कामकाज, वित्तीय सहायता योजना, निर्यात के अवसरों, निर्यात की मुख्य प्रक्रियाओं और वैश्विक कृषि व्यापार में भाग लेने के लिए महिला उद्यमियों को मिलने वाली संस्थागत सहायता के बारे में जागरूकता पैदा करना था.

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