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'1947 में मोदी जैसा PM होता तो नहीं होता लाखों हिंदुओं का कत्लेआम’, CM योगी का कांग्रेस पर बड़ा हमला

सीएम ने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर निर्दोष हिंदू मारे-काटे जाते हैं. देश के अंदर कुछ राजनेता वहां की घटना पर कुछ नहीं बोलते, जो यहां की हर घटना में हाय-तौबा करते घूमते हैं. उन्होंने पूछा कि 14 अगस्त 1947 की घटना के लिए किसकी जवाबदेही थी.

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14 Aug 2026
( Updated: 14 Aug 2026
07:20 PM )
'1947 में मोदी जैसा PM होता तो नहीं होता लाखों हिंदुओं का कत्लेआम’, CM योगी का कांग्रेस पर बड़ा हमला
Image Credit: Facebook/@MYogiAdityanath
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सीएम योगी ने कहा कि 1947 में कांग्रेस एक बार अड़ गई होती तो देश का विभाजन नहीं होता. वहीं, यदि उस समय कोई नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता. उन्होंने सपा सरकार में हिंदुओं के हत्यारों को मिली राहत और श्रीराम जन्मभूमि के खिलाफ की गई पैरवी का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि रामद्रोहियों से अंतिम दम तक निपटेंगे. उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में परमहंस रामचंद्र दास महाराज के योगदान को याद किया.  

परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि पर दिगंबर अखाड़े में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के सभी राम भक्तों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने बताया कि पूज्य महाराज के जीवन का एक ही ध्येय था कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो. 1949 से लेकर उनके भौतिक शरीर के रहने तक महाराज का पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित रहा.

सीएम ने कहा कि इतिहास केवल पढ़ने और परीक्षा में प्रश्नपत्र का उत्तर देने का माध्यम नहीं होता है. इतिहास एक प्रेरणा और सबक भी होता है. इससे जुड़े क्षणों से गर्व की अनुभूति होती है व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. जब भी हम उसकी अनदेखी करते हैं, इसका मतलब है कि हम अतीत की उन गलतियों को दोहराने का फिर से प्रयास कर रहे हैं.

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मोदी जैसा पीएम होता तो नहीं होता हिंदुओं का कत्लेआम
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में अगर कांग्रेस एक बार अड़ गई होती, तो देश का विभाजन नहीं होता. कोई लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल या नरेंद्र मोदी जैसा देश का प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता. कश्मीर में शांति, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, देश के अंदर माओवाद और नक्सलवाद की समाप्ति जैसे कई अहम मुद्दे इनकी पीड़ा हैं क्योंकि ये इनकी कमाई के जरिया थे. देश को अस्थिर करने का यही माध्यम था.

आज भारत का नागरिक कहीं बाहर जाता है, तो दुनिया में सम्मान पाता है. यह सम्मान यूपीए सरकार के समय में नहीं था. तब सनातन धर्म की चर्चा नहीं होती थी. अयोध्या में राम मंदिर, काशी में काशी विश्वनाथ धाम नहीं बन पाया था. वहीं, मथुरा-वृंदावन सजते नहीं थे. पूर्व में समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा था कि सरकार आएगी तो सपा कंस की मूर्ति लगाएगी. इसके बाद श्री वृंदावन बिहारी ने उनको हमेशा के लिए ही विदा कर दिया.

संभल में 1526 में एकजुटता दिखाने से रोका जा सकता था अयोध्या का विनाश
सीएम ने कहा कि 1526 में आज से 500 वर्ष पहले आज के संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर एक गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया. अगर 1526 में उसका प्रतिकार एकजुट होकर संभल में हुआ होता, तो वर्ष 1528 में अयोध्या में उसे दोहराने का दुस्साहस कोई नहीं करता. मात्र दो वर्ष में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर को क्षतिग्रस्त करने के साथ सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करते हुए गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया. वहीं, 14 अगस्त 1947 को आजादी के एक दिन पहले केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटे थे, भारत भी कटा था.

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पाकिस्तान-बांग्लादेश की घटनाओं पर चुप्पी
सीएम ने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर निर्दोष हिंदू मारे-काटे जाते हैं. देश के अंदर कुछ राजनेता वहां की घटना पर कुछ नहीं बोलते, जो यहां की हर घटना में हाय-तौबा करते घूमते हैं. उन्होंने पूछा कि 14 अगस्त 1947 की घटना के लिए किसकी जवाबदेही थी. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, उनको सत्ता चाहिए थी, देश की प्रजा से कोई लेना-देना नहीं था. आज भी वही स्थिति है. नाम, चेहरे बदले गए, लेकिन काम करने का तरीका अभी भी वही है.

सपा सरकार में हिंदुओं के हत्यारों को मिली राहत
सीएम ने कहा कि संभल के बारे में हमेशा से मान्यता थी कि वहां जाने लायक स्थिति नहीं है. संभल को जिला बने हुए लगभग 30 साल हो गए, उसका मुख्यालय नहीं बन पाया था. संभल में न्यायालय के आदेश पर एक टीम सर्वे करने गई थी. इसी को लेकर उपद्रव किया गया. उपद्रव में निशाना पुलिसकर्मी और निर्दोष हिंदू थे. 1947 से कमोबेश कोई वर्ष ऐसा नहीं बीता था, जब वहां दंगे न हुए हों. 1976 और 1978 में इतना भीषण दंगा हुआ था कि एक साथ 150 हिंदू मार दिए गए. वहीं, 1996 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने बड़ी बेशर्मी के साथ सभी मुकदमे वापस ले लिए. एक भी दरिंदे को सजा नहीं मिली. ये स्वतंत्र भारत में सामूहिक नरसंहार की घटना थी.

संभल में बन रहा जिला मुख्यालय
सीएम ने कहा कि 2024 में संभल दंगाइयों को चिन्हित कर कार्रवाई करते हुए हालात नियंत्रित किए गए. जांच में पता चला कि संभल में केवल हरिहर मंदिर ही नहीं है, वहां 67 तीर्थ, 19 कूप और 10 हजार एकड़ भूमि पर भी कब्जा हो गया था. इसे कब्जा मुक्त कराया गया. अब खाली भूमि का वहां के गरीबों, दलितों व कमजोर वर्ग के लोगों को आवंटन किया जा रहा है. वहां जिला मुख्यालय का निर्माण भी किया जा रहा है. आज संभल बदल चुका है. अब वहां दंगा नहीं होता है. शांति व सौहार्द का माहौल है.

आज बदल गई है अयोध्या
सीएम ने कहा कि पूर्व में अयोध्या को पर्वों-त्योहारों से भी वंचित किया जाता था. इसे संकरी गलियों और गंदगी का एक पर्याय बना कर रख दिया था. यहां के घाट, राम जी की पैड़ी, सरयू जी का जल सड़ता रहता था. श्रद्धालु आंख-नाक बंद कर डुबकी लगाने के लिए मजबूर थे. आज बदली हुई अयोध्या हमें त्रेता युग का स्मरण कराती है. अब यहां के हमारे संतों को देश-दुनिया में चिढ़ाया नहीं जाता है. अयोध्या का नाम सुनकर कोई व्यक्ति उन्हें पूरा सम्मान देता है. श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान पूज्य संतों ने जो संघर्ष किया, वह अकल्पनीय था.

उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले व राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाने वाले लोग फिर साजिश कर रहे हैं. श्रीराम जन्मभूमि में चढ़ावा चोरी से संबंधित एक प्रकरण सामने आया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की सिफारिश पर एसआईटी बनी. अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. हालांकि, आज श्रीराम जन्मभूमि के खिलाफ लड़े जाने वाले मुकदमे में लंबी-चौड़ी पैरवी करने वाले खुद को राम भक्त घोषित करने में जुटे हैं.

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अंतिम दिनों में भी राम मंदिर की बात करते थे परमहंस महाराज
सीएम योगी ने महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज से जुड़े पुराने दिनों को याद किया. बताया कि उनका 1949 से पहले से गोरक्षपीठ के साथ जुड़ाव रहा. सांसद (सीएम योगी) रहने के दौरान दिल्ली से लखनऊ आने के बाद गोरखपुर की यात्रा के बीच दिगंबर अखाड़ा में परमहंस जी महाराज से मिलना होता था. सीएम योगी ने कहा कि गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ अक्सर मुझे परमहंस जी का आशीर्वाद लेकर आने के लिए कहते थे. साथ ही बताया, परमहंस जी महाराज के अंतिम दिनों में कई बार दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ. वे अक्सर राम मंदिर निर्माण के बारे में पूछते थे. सीएम ने परमहंस जी के गोरक्षपीठ आगमन की यादों का भी जिक्र किया.

राम भक्तों का बनवाया स्मारक
सीएम ने बताया कि 1990 में राम भक्तों पर जब गोलियां चलाई गईं, तो परमहंस जी महाराज ने दिगंबर अखाड़े के बाहर राम भक्तों का स्मारक बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद डंके की चोट पर उन्होंने स्मारक बनवाने का काम किया, उस वक्त सरकार भी रोक नहीं पाई थी. राम भक्ति का यह उद्भट स्वरूप देखने को बहुत कम मिलता है.

राम द्रोहियों से अंतिम दम तक निपटेंगे
सीएम ने कहा कि जब चंदा चोरी की घटना सामने आई थी, हम लोगों को भी कष्ट हुआ था. इस पर कार्रवाई भी हुई. हालांकि, राम द्रोही अयोध्या धाम, श्रीराम जन्मभूमि, सनातन धर्म को अपमानित करने के साथ देश के अंदर माहौल खराब करने में जुट गए. हम सबको इसके प्रति सतर्क रहना होगा. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई एक लंबी चलने वाली लड़ाई है. ऐसा नहीं है कि सत्ता के मद में हम लोग मौन हो जाएंगे. जो राम द्रोही होगा, उससे अंतिम दम तक निपटेंगे और पूरी ताकत से उसका मुकाबला भी करेंगे. तभी पूज्य परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी स्मृति को नमन करना सार्थक होगा.

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परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिगंबर अखाड़ा के महंत पूज्य सुरेश दास जी महाराज, पूज्य संत डॉ. राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज, पूज्य संत डॉ. रामकमल दास वेदांती जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा जी, जगद्गुरु राघवाचार्य जी महाराज, जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्न दास जी, श्री महंत जन्मेजय शरण जी महाराज, श्री महंत माधव दास जी महाराज, महंत गंगा दास जी महाराज, महंत शिव शंकर दास जी महाराज, महंत भरत दास जी महाराज, महंत रविंद्र दास जी महाराज समेत अन्य संतगण भी मौजूद रहे.

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