दान-पैसे से लेकर भीड़ और सुरक्षा तक... राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्र के कंधों पर होंगी ये 5 बड़ी जिम्मेदारियां
राम मंदिर CEO पद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नाम पर अंतिम मुहर लगी चुकी है. उनकी नियुक्ति को मंदिर के बढ़ते कामकाज को व्यवस्थित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. उनके कार्यभार संभालते ही मंदिर प्रशासन के कामकाज में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
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अयोध्या के राम मंदिर के प्रशासनिक और रोजमर्रा के संचालन को लेकर अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति के बाद मंदिर के संचालन में जवाबदेही, समन्वय और कामकाज की निगरानी का ढांचा पहले से अधिक व्यवस्थित हो सकता है.
कई चरण में चली चयन प्रक्रिया
इस नियुक्ति तक पहुंचना भी आसान नहीं था. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, CEO पद के लिए देशभर से 5585 आवेदन मिले थे. इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की तकनीकी और मैनुअल स्क्रीनिंग की गई. पात्रता, अनुभव और अन्य मानकों के आधार पर उम्मीदवारों को आगे बढ़ाया गया. इसके बाद चयन समिति ने 600 अंकों के मूल्यांकन फॉर्म के आधार पर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की. इसमें 3577 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया. 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले 108 उम्मीदवार अगले चरण में पहुंचे. अंतिम चरण की प्रक्रिया अगस्त में आगे बढ़ी. 3 से 6 अगस्त के बीच 16 उम्मीदवारों से ऑनलाइन बातचीत और साक्षात्कार किए गए. इसके बाद 11 और 12 अगस्त को इन्हीं उम्मीदवारों के अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू हुए. 26 अगस्त तक चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची और इसके बाद नामों का पैनल तैयार किया गया.
छह नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा गया
सर्च कमेटी ने 1 सितंबर को अपनी विस्तृत रिपोर्ट के साथ छह नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा. इन छह नामों को दो प्राथमिकता वाले पैनल में बांटा गया था. पहली प्राथमिकता वाले तीन नामों में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र सबसे ऊपर थे. दूसरे स्थान पर मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और तीसरे स्थान पर श्रुति भारद्वाज का नाम था. दूसरी प्राथमिकता वाले तीन नामों को भी पैनल में रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर क्रम के अनुसार अगले उम्मीदवार पर विचार किया जा सके. ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के मुताबिक, इस पूरी चयन प्रक्रिया को सर्च कमेटी और उसके सचिव समीर पांडा की देखरेख में आगे बढ़ाया गया. बड़ी संख्या में मिले आवेदनों में से योग्य उम्मीदवारों की छंटनी के बाद छह नाम अंतिम रूप से ट्रस्ट के सामने रखे गए. इसके बाद 2 सितंबर को हुई ट्रस्ट की बैठक में पहली प्राथमिकता वाले नामों में से एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नाम की घोषणा कर दी गई.
क्यों जरूरी माना जा रहा है CEO का पद?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बड़ी है और मंदिर परिसर से जुड़े प्रशासनिक काम भी व्यापक हैं. ऐसे में रोजमर्रा के संचालन के लिए एक प्रमुख कार्यकारी अधिकारी की व्यवस्था अहम मानी जा रही है. अभी बड़े कामों में ट्रस्ट, उसकी समितियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय की जरूरत होती है. CEO व्यवस्था में दैनिक कामकाज की जिम्मेदारी एक प्रमुख अधिकारी के स्तर पर केंद्रित होगी.
CEO के सामने पांच बड़ी जिम्मेदारियां
पहली बड़ी जिम्मेदारी दान और चढ़ावे के प्रबंधन की होगी. इसके लिए बेहतर अकाउंटिंग सिस्टम, वित्तीय निगरानी और विशेषज्ञों की मदद महत्वपूर्ण होगी. इससे आर्थिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर जोर रहेगा. दूसरी जिम्मेदारी मंदिर से जुड़े करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के काम की निगरानी होगी. सुरक्षा, सफाई और मैनेजमेंट जैसे अलग-अलग विभागों में तैनात कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना भी CEO की जिम्मेदारी होगी. तीसरा बड़ा काम इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा होगा. मंदिर परिसर में बचे हुए निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाना, सीसीटीवी नेटवर्क को दुरुस्त रखना और ट्रस्ट के फैसलों को जमीन पर लागू कराना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी. चौथी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं की सुविधा और क्राउड मैनेजमेंट की होगी. त्योहारों और विशेष अवसरों पर जब बड़ी संख्या में लोग अयोध्या पहुंचते हैं, तब दर्शन व्यवस्था, लोगों की आवाजाही और सुरक्षा के लिए पुलिस तथा प्रशासन के साथ मिलकर योजना बनाना जरूरी होगा. पांचवीं जिम्मेदारी ट्रस्ट और सरकार के बीच समन्वय की होगी. CEO ट्रस्ट बोर्ड और उसके चेयरमैन के अधीन काम करेंगे. साथ ही राज्य सरकार, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल बनाने में उनकी भूमिका अहम रहेगी.
ट्रस्ट के पास 1882 करोड़ रुपये
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति भी चर्चा में है. मणिराम दास छावनी में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा-जोखा रखा गया. इसके अनुसार वर्ष के दौरान करीब 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि करीब 91 करोड़ रुपये का व्यय हुआ. निर्माण समेत विभिन्न कार्यों पर करीब 425 करोड़ रुपये खर्च किए गए. 21 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब 1882 करोड़ रुपये की राशि होने की जानकारी दी गई.
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बहरहाल, यह माना जा सकता है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक पद भरने का फैसला नहीं है. यह राम मंदिर के बढ़ते आकार, श्रद्धालुओं की संख्या और उससे जुड़े व्यापक प्रबंधन को अधिक केंद्रीकृत और व्यवस्थित तरीके से चलाने की दिशा में अहम कदम माना जा सकता है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई CEO व्यवस्था जमीन पर किस तरह काम करती है और मंदिर के संचालन में इसका असर कितना दिखाई देता है. श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था इसकी सबसे बड़ी कसौटी होगी.