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बंगाल में आधी रात जारी हुई पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, 29 लाख नामों पर हुआ फैसला, साथ ही चुनाव आयोग ने 26% RO हटाए

Bengal Assembly Election: चुनाव आयोग ने बीती रात करीब 11:55 बजे SIR के बाद पहली पूरक सूची जारी कर दी. इसमें विचाराधीन 60 लाख नामों में से करीब 29 लाख नामों पर फैसला हो गया है.

बंगाल में आधी रात जारी हुई पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, 29 लाख नामों पर हुआ फैसला, साथ ही चुनाव आयोग ने 26% RO हटाए
Bengal SIR/ First Supplementary List Released
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चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए SIR के बाद आधी रात को पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट यानि पूरक मतदाता सूची जारी कर दी है. निर्वाचन आयोग ने ये लिस्ट सोमवार की आधी रात करीब 11:55 बजे जारी की, जिसके बाद कयासबाजियों का दौर शुरू हो गया. इस लिस्ट में उन मतदाताओं के नाम हैं, जिनके नाम 'निर्णय प्रक्रिया' के अधीन थे और जिन पर कोर्ट द्वारा नियुक्त ज्यूडिशियल ऑफिशियल द्वारा फैसला लिया गया है.

बंगाल में जारी हुई पहली पूरक सूची

आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग ने 28 फरवरी को जो अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी उसमें करीब 60 लाख नामों को ‘विचाराधीन' थे. इन पर फैसला लेने के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी. इन्हें ये तय करना था कि लास्ट वोटर लिस्ट में जितने भी पेंडिंग वोटर्स हैं, उनको रखा है या नहीं. बीती रात जारी पूरक सूची के मुताबिक इनमें से 29 लाख नामों पर अब तक फैसला हो चुका है.  हालांकि ये मालूम नहीं चल पाया है कि जिनके नाम कटे हैं और जिनके नाम हैं, वो कौन हैं, क्योंकि वेबसाइट पर अपलोडेड डेटा को डाउनलोड नहीं किया जा सका.

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आपको जानकारी देते चलें कि जैसे ही चुनाव आयोग द्वारा पूरक सूची और फिर फुल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, उसके बाद अपना नाम उसमें सर्च कर सकते हैं, इसके लिए  उन्हें (मतदाताओं को) अपने विधानसभा क्षेत्र के नाम और नंबर और बूथ की जानकारी डालकर सर्च करना होगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीती रात से ही भारी संख्या में मतदाता अपना खोजने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन, वेबसाइट पर भारी दबाव और ग्लिच के कारण लोग अपनी जानकारी नहीं खोज पा रहे हैं क्योंकि लिस्ट ही नहीं डाउनलोड हो पा रही है. 

जल्द प्रकाशित होगी सूची

पश्चिम बंगाल के CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने जानकारी दी कि अब तक लगभग 29 लाख नामों की जांच की जा चुकी है. वहीं अन्य अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे न्याय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, और भी पूरक सूचियां प्रकाशित की जाएंगी. वहीं पहली पूरक सूची जारी होने के बाद हंगामे की आशंका को देखते हुए राज्य में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है. 

भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल से 73 रिटर्निंग अधिकारियों को हटाया

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इसके अलावा भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार शाम को एक अहम घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) को हटा दिया. पश्चिम बंगाल में अगले महीने 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं. 

राज्य कैडर के अधिकारियों पर ताबड़तोड़ एक्शन-भिड़ी TMC-BJP

इस घटनाक्रम से चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव का एक नया मोर्चा खुल गया है. राज्य सरकार और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पहले से ही आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. यह विरोध राज्य कैडर के कई नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर है, जिनमें पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पूर्व राज्य गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस के पूर्व कमिश्नर सुप्रतिम सरकार जैसे नाम शामिल हैं.

बंगाल में 26% रिटर्निंग ऑफिसर हटाए गए!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 294 है और हर सीट के लिए आमतौर पर एक रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) नियुक्त किया जाता है. 73 आरओ को हटाए जाने के साथ ही, राज्य में कुल आरओ में से लगभग 26 प्रतिशत को बदल दिया गया है. आयोग ने सोमवार रात इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की.

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अधिकारियों को हटाने का मामला हाई कोर्ट में

इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई. याचिका में राज्य कैडर के कई शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले के ईसीआई के फैसले को चुनौती दी गई है. इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई सोमवार को हुई. सुनवाई के दौरान, ईसीआई के वकील ने कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच को बताया कि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले हर राज्य में जमीनी स्तर की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं. वकील ने दलील दी कि हालांकि आयोग के पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन उसके पास यह अधिकार जरूर है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फैसले ले सके कि मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त रहे.

बुधवार को होगी सुनवाई

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उन्होंने कोर्ट के सामने उन नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का ब्योरा भी पेश किया, जिनका तबादला किया गया है, जिन्हें बदला गया है, या जिन्हें चुनाव वाले अन्य राज्यों में डेपुटेशन पर भेजा गया है. मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच द्वारा इस मामले पर अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की गई है. मालूम हो कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर विधानसभा चुनाव दो चरणों- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी.

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