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लोकायुक्त की स्वर्ण जयंती पर बोले सीएम योगी- जनविश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी. तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है. उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके. लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है.
मुख्यमंत्री ने दी 50 वर्ष की शानदार यात्रा के लिए दी बधाई
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है. गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है. जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता. अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है.
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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता. सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके. शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए. साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा. झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं.
मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं. ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है. आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं.
साढ़े नौ वर्षों में राजस्व के 34 लाख लंबित मामलों का हुआ समाधान
राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे. पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया. हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं. पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है. अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी.
मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे. आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं. बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली. यही सुशासन है.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी. तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने.
उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया. कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए. देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो. स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त
लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है. उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया. कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है. डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है. उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया.
लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास
उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है. लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं. चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है. इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है.
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चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन
उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है. वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया.
1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत
संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है. सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई. वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई. इसमें वर्ष 2018 में सर्वाधिक छह करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिली. पिछले पांच वर्षों में जांच-पड़ताल के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं.
स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का हुआ विमोचन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया. साथ ही 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी.
कार्यक्रम में लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह और सुरेंद्र कुमार यादव समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.