रेस्टोरेंट में पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी, गैस सप्लाई की स्थिति जानी, इंडक्शन अपनाने की दी सलाह
मुख्यमंत्री धामी ने आगे कहा कि गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन सहित अन्य विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है. सरकार हर तरह से लोगों की मदद करने के लिए तैयार है.
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गढ़ी कैंट क्षेत्र में एक रेस्टोरेंट में पहुंच कर, रसोई गैस आपूर्ति का जायजा लिया. इसकी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी.
सीएम धामी ने रेस्टोरेंट में पहुंच लिया रसोई गैस आपूर्ति का जायजा
मुख्यमंत्री धामी ने सभी होटल और रेस्टोरेंट संचालकों से कहा कि अभी गैस का बहुत अधिक संकट नहीं है, फिर भी आने वाले दिनों में यदि जरूरत पड़ी तो देशवासियों को इस बार भी कोरोना काल की तरह एकजुटता के साथ इस चुनौती का सामना करना होगा.
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रेस्टोरेंट संचालक से गैस आपूर्ति के बारे में पूछा, इस दौरान रेस्टोरेंट संचालक ने कहा कि सप्लाई में थोड़ा कमी तो आई है, लेकिन फिलहाल गैस लगातार मिल रही है. रेस्टोरेंट संचालक ने बताया कि वो गैस की खपत कम करने के लिए तंदूर का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं.
सीएम धामी ने कहा कि अभी गैस की आपूर्ति हो रही है.
मुख्यमंत्री ने भी इस पहल को सराहते हुए, प्रशासन को वैकल्पिक ऊर्जा के लिए जरूरी प्रबंध करने के निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान सीएम धामी ने कहा कि अभी गैस की आपूर्ति हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आपूर्ति सुचारू रखने के लिए पूरा प्रयास कर रही है.
उन्होंने सभी होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के साथ ही आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो देश एकजुटता से इस चुनौती का सामना करेगा. जिस तरह कोरोना काल में देश ने एकजुटता का परिचय दिया था, उसी तरह के धैर्य का परिचय इस बार भी जरूरी है.
"गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन का प्रयोग करें"
मुख्यमंत्री धामी ने आगे कहा कि गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन सहित अन्य विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है. सरकार हर तरह से लोगों की मदद करने के लिए तैयार है.
मुख्यमंत्री ने आवास परिसर में शहद निष्कासन कार्य किया. उन्होंने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री आवास परिसर एवं आस-पास के क्षेत्र में 3-बी गार्डन विकसित करने की दिशा में कार्य किए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं. राज्य में प्रचुर मात्रा में फूलों की प्रजातियां हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले जैविक शहद उत्पादन में सहायक हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय गुणों वाला शहद तैयार करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए.
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