टॉयलेट में कैश, कई ठिकानों पर खपाए पैसे! राम मंदिर चंदा कांड में सनसनीखेज खुलासे
Ram Mandir donation Scandal: इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पुलिस ने करीब दो घंटे तक लंबी पूछताछ की, जिसमें कई ऐसे खुलासे हुए हैं जिन्होंने जांच को एक नए मोड़ पर ला दिया है.
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Ram Mandir donation Scandal: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान में कथित गड़बड़ी के मामले में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं. इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पुलिस ने करीब दो घंटे तक लंबी पूछताछ की, जिसमें कई ऐसे खुलासे हुए हैं जिन्होंने जांच को एक नए मोड़ पर ला दिया है. अब पुलिस सिर्फ चोरी हुए पैसों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे खेल की योजना कैसे बनाई गई, इसमें कौन-कौन शामिल था और आखिर इतने दिनों तक यह सब बिना किसी को भनक लगे कैसे चलता रहा...
कैसे छिपाए जाते थे दान के पैसे?
पूछताछ में सामने आया कि दान की गिनती के दौरान कथित तौर पर नकदी निकालने के बाद उसे तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था. ऐसा करने से पकड़े जाने का खतरा था, इसलिए पहले पैसे मंदिर परिसर के अंदर बने शौचालय में छिपा दिए जाते थे. बाद में जब मौका मिलता, तब उन पैसों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला जाता था ताकि किसी को शक न हो. पुलिस का मानना है कि यह तरीका काफी सोच-समझकर अपनाया गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को धोखा दिया जा सके.
कैमरों को चकमा देने के लिए बनाई जाती थी 'मानव ढाल'
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे काम को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी. उन्होंने दान गिनने वाले कमरे का लेआउट, सीसीटीवी कैमरों की दिशा, कर्मचारियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन किया था.
जब एक आरोपी गिनती के दौरान पैसे निकालता था, तो बाकी साथी उसके चारों ओर इस तरह खड़े हो जाते थे कि कैमरे की नजर सीधे उस तक न पहुंच सके. यानी कैमरों के सामने इंसानों की एक ढाल बना दी जाती थी. इसके बाद चोरी की गई नकदी को ऐसे रास्तों से ले जाया जाता था, जहां कैमरों की निगरानी कम थी और फिर उसे शौचालय में छिपा दिया जाता था.
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अब पुलिस कर रही है पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन
इन खुलासों के बाद पुलिस अब मंदिर परिसर के अंदर नकदी के मूवमेंट को दोबारा समझने की कोशिश कर रही है. अधिकारी मौके पर जाकर यह देख रहे हैं कि आखिर चोरी के पैसे किस रास्ते से ले जाए गए होंगे. इसके साथ ही उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है, जो शौचालय की सफाई और रखरखाव का काम देखते थे. पुलिस यह जानना चाहती है कि क्या उन्हें कभी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी थी या फिर नोटों से भरे पैकेट नजर आए थे.
काउंटिंग रूम की चाबी को लेकर भी बड़ा सवाल
पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने एक और अहम दावा किया. उसके मुताबिक, दान गिनने वाले सुरक्षित कमरे की दो चाबियां थीं. इनमें से एक चाबी सह-आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास रहती थी, जबकि उसका सीधे तौर पर नकदी गिनने के काम से कोई संबंध नहीं था. दूसरी चाबी बैंक अधिकारियों के पास होती थी, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते थे.
अब पुलिस यह जांच रही है कि यदि टिन्नू के पास वास्तव में चाबी थी, तो क्या उसने इसका गलत इस्तेमाल किया और क्या इसी वजह से उसे कमरे में बिना अनुमति प्रवेश करने का मौका मिलता था.
क्या चोरी का पैसा संपत्तियों में लगाया गया?
जांच अब सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं रही. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं चोरी के पैसों को जमीन, हॉस्टल या अन्य मकानों और संपत्तियों में तो निवेश नहीं किया गया. इसके लिए आरोपियों के बैंक खातों, लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है. अधिकारियों की कोशिश है कि यह पता लगाया जाए कि आरोपियों की संपत्ति उनकी घोषित आय से कहीं ज्यादा तो नहीं है.
अब तक क्या-क्या बरामद हुआ?
इस मामले में पुलिस अब तक करीब 79.85 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने-चांदी के कई आभूषण बरामद कर चुकी है. सबसे बड़ी बरामदगी मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से हुई, जहां से 20.39 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के गहने मिले.
इसके अलावा करुणेश पांडेय के यहां से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा के पास से 16.82 लाख रुपये, लव कुश मिश्रा के घर से 14.25 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्रा के यहां से 7.32 लाख रुपये, मनीष यादव के पास से 2 लाख रुपये और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के यहां से 1 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं.
गांव में भी चला तलाशी अभियान
बुधवार को पुलिस की एक बड़ी टीम ने आरोपी लव कुश मिश्रा के गांव स्थित घर पर भी तलाशी ली. पुलिस ने सिर्फ घर ही नहीं बल्कि आंगन, भूसे के ढेर और उपलों के बीच भी छिपाकर रखी गई नकदी या कीमती सामान की तलाश की. इस कार्रवाई को देखने के लिए गांव के बड़ी संख्या में लोग भी मौके पर जुट गए. फिलहाल इस मामले में सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देगी SIT
इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी जांच पूरी करने के लिए अब 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी के अनुरोध को मंजूरी देते हुए तय समय के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं.
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यह एसआईटी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को बनाई गई थी. शुरुआती जांच रिपोर्ट 23 जून को सरकार को सौंपी गई थी, जिसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और उसके बाद लगातार गिरफ्तारियां हुईं. अब पुलिस फॉरेंसिक जांच, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की मदद से पूरे मामले की हर कड़ी जोड़ने में जुटी हुई है. जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे सामने आ सकते हैं.