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महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम, देश में पहली बार महिलाओं को मिलेगा 'किसान' का दर्जा, बदला खेती का कानून

Women Farmers Empowerment Bill: महाराष्ट्र में “महिला किसान सशक्तिकरण बिल” को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है. इस फैसले के बाद अब खेती और उससे जुड़े काम करने वाली महिलाओं को भी आधिकारिक तौर पर किसान माना जाएगा.

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03 Jul 2026
( Updated: 03 Jul 2026
10:47 AM )
महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम, देश में पहली बार महिलाओं को मिलेगा 'किसान' का दर्जा, बदला खेती का कानून
Image Source: Pexels
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Maharashtra Women Farmer Bill 2026: महाराष्ट्र विधानसभा ने एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, जो देश में पहली बार देखने को मिला है. राज्य में “महिला किसान सशक्तिकरण बिल” को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है. इस फैसले के बाद अब खेती और उससे जुड़े काम करने वाली महिलाओं को भी आधिकारिक तौर पर किसान माना जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि अब उन्हें सिर्फ काम करने वाली मजदूर नहीं, बल्कि असली किसान के रूप में पहचान मिलेगी...

अब महिलाओं को भी मिलेगा सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ

अब तक ग्रामीण इलाकों में लाखों महिलाएं खेतों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती थीं, बुआई से लेकर कटाई तक. लेकिन चूंकि ज़मीन अक्सर पुरुषों के नाम होती थी, इसलिए इन महिलाओं को सरकारी रिकॉर्ड में किसान नहीं माना जाता था. इसी वजह से वे कई बार बैंक लोन, बीमा और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाती थीं. इस नए कानून के बाद यह स्थिति बदल जाएगी. अब महिलाएं भी सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकेंगी और उन्हें आर्थिक मदद पाने में आसानी होगी.

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खेती ही नहीं, हर जुड़े काम को मिलेगी पहचान

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इस बिल में “महिला किसान” की परिभाषा को काफी व्यापक रखा गया है. अब सिर्फ फसल उगाने वाली महिलाएं ही नहीं, बल्कि पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसे काम करने वाली महिलाओं को भी किसान माना जाएगा.
सरकार इन सभी महिलाओं के लिए एक खास “महिला किसान पहचान पत्र” जारी करेगी. इस कार्ड की मदद से उन्हें बैंक से लोन, फसल बीमा, सब्सिडी, बीज और खाद जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी. साथ ही वे अपनी उपज को सीधे मंडियों में बेच भी सकेंगी, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.

ग्रामीण महिलाओं के लिए नई ताकत और पहचान

इस फैसले से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. अब वे सिर्फ खेतों में काम करने वाली श्रमिक नहीं रहेंगी, बल्कि एक स्वतंत्र किसान के रूप में अपनी पहचान बना सकेंगी. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत बन पाएंगी.
सरकार का मानना है कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगा और उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी भी देगा.

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हालांकि सदन में यह भी बात सामने आई कि सिर्फ पहचान देना काफी नहीं है. महिलाओं की सेहत, पोषण और जमीन पर सह-मालिकाना अधिकार जैसे मुद्दों पर भी काम करना जरूरी है. इसके लिए आगे एक राज्य स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी.
कुल मिलाकर, यह कानून सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए सम्मान, पहचान और अवसरों का एक नया दरवाजा खोलने जैसा कदम माना जा रहा है..

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