44 परीक्षाएं रद्द, कई स्थगित, फास्ट ट्रैक कोर्ट-निगरानी सेल का गठन…रंग लाया छात्र आंदोलन, झारखंड सरकार का बड़ा ऐलान
झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है. सरकार ने 44 परीक्षाएं रद्द करने के अलावा कई परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला किया है. ऐसे में 2628 अफसरों-कर्मियों की नौकरियां खत्म हो जाएंगी. इसके बाद अब चयनित अभ्यर्थियों का भी आंदोलन शुरू हो गया है.
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झारखंड में छात्रों आंदोलनकारियों की बड़ी जीत हुई है. सरकार ने राज्य में नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई की है. सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने JPSC और JSSC की ओर से आयोजित क़रीब 44 परीक्षाएं एक साथ रद्द कर दी हैं.
इतना ही नहीं झारखंड सरकार ने उन 44 भर्ती परीक्षाओं की सूची भी जारी कर दी है जिन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने आयोजित किया था, लेकिन गड़बड़ियों की शिकायतों और मामले की CID/SIT जांच के बाद उन्हें रद्द कर दिया गया.
सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तीन महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं.
न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार सरकार ने परीक्षा रद्द करने के अलावा अन्य दूसरे ऐलान भी किए हैं.
1. JPSC/JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों और कदाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध हाई कोर्ट से किया जाएगा.
2. JPSC और JSSC के भीतर एक आंतरिक निगरानी सेल (Internal Monitoring Cell) बनाया जाएगा.
3. JPSC और JSSC में परीक्षा सुधारों पर व्यापक अध्ययन करने के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी. इस समिति में अन्य अधिकारियों के साथ-साथ किसी प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक भी सदस्य के तौर पर शामिल होंगे. समिति अगले दो महीनों के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
2,628 चयनित अभ्यर्थियों की गई नौकरी!
इन फैसलों से 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं. इनमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से नियुक्त 342 अधिकारी, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 63 एसडीपीओ, 237 महिला पर्यवेक्षिका और जेएसएससी-सीजीएल से नियुक्त 1,932 कर्मचारी शामिल हैं. ये सभी लोग अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे थे या इनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए थे.
इतना ही नहीं सरकार ने 6 अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी है, जबकि वर्ष 2014 से लेकर अब तक आयोजित 17 भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है. राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने मंगलवार रात 11.45 बजे इससे संबंधित कुल आठ अधिसूचनाएं जारी की हैं. विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचनाओं में बताया गया है कि ये फैसले सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिए गए हैं.
Jharkhand Government issues lists of examinations that have been cancelled following "complaints regarding irregularities in ongoing examinations conducted by the Jharkhand Public Service Commission (JPSC) and executed through TDPL, and based on facts brought before the… pic.twitter.com/lSR0Z86GNT
— ANI (@ANI) August 19, 2026
सरकार के फैसले के तहत जेएसएससी की विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा यानी जेएसएससी-सीजीएल को रद्द कर दिया गया है. इस परीक्षा के माध्यम से 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी. इसके अलावा झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2023 और 2025 की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं.
सरकार ने विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक और महिला पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर तथा मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर की भर्ती से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं. इसके अलावा सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सहायक लोक अभियोजक और फूड सेफ्टी ऑफिसर से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं. झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी जेईटी-2024 को भी रद्द कर दिया गया है.
सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी वर्तमान भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया है. इनमें विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती. सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी की नियमित और बैकलॉग भर्ती, ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की बैकलॉग भर्ती, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर की भर्ती शामिल हैं.
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इसके अलावा सरकार ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने के बजाय अगले आदेश तक स्थगित करने का फैसला किया है. इन परीक्षाओं की प्रारंभिक प्रक्रिया टीडीपीएल के अलावा दूसरी एजेंसियों के माध्यम से कराई गई थी. इनमें फूड एनालिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन, डायरेक्टर, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज और बॉयलर इंस्पेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया शामिल है. इन एजेंसियों की विश्वसनीयता और भूमिका की जांच सीआईडी को सौंपी गई है. जांच पूरी होने तक इन भर्तियों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
सरकार ने पुरानी 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है. इनमें पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2013, सिविल जज की विभिन्न परीक्षाएं, मृदा संरक्षण अधिकारी, कृषि अधिकारी, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ, सहायक अभियंता और डेंटल डॉक्टर समेत अन्य परीक्षाएं शामिल हैं.
समिति में राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी सदस्य बनाया जाएगा. समिति दोनों आयोगों की परीक्षा प्रणाली और पूरी प्रक्रिया का अध्ययन कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.
JSSC-CGL रद्द करने के विरोध में चयनित अभ्यर्थी सड़क पर उतरे
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में मंगलवार को चयनित अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए. बड़ी संख्या में सफल और नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च निकाला और सरकार के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की.
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है. पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा में सफलता हासिल की.
Jharkhand government issued a list of 44 recruitment exams conducted by the Jharkhand Public Service Commission (JPSC) and the Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) that have been cancelled following complaints of irregularities and CID/SIT investigations into the matter.… pic.twitter.com/skiyDfKEm7
— ANI (@ANI) August 19, 2026Advertisement
चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक निकाला मार्च
मार्च के दौरान अभ्यर्थियों ने ‘न्याय दो या फांसी दो’ जैसे नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन कथित गड़बड़ी के लिए पूरी परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं है.
अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से उन लोगों का भविष्य प्रभावित होगा, जिन्होंने चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान भी दे दिया है. उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार कर निर्दोष और सफल अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है.
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उन्होंने कहा कि आंदोलन का खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने पूरी मेहनत से परीक्षा पास की है. अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया तो उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वे अपने भविष्य और नौकरी की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे.
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बता दें कि राज्य सरकार ने 17 अगस्त को कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल एजेंसी के जरिए आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी. सरकार के इस फैसले के बाद एक ओर आंदोलनकारी छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है, वहीं चयनित अभ्यर्थियों ने फैसले के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है.