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‘ये तो जमानत भी नहीं बचा पाए…’ चुनावों में कब होती है उम्मीदवार की जमानत जब्त, कैसे तय होती है रकम? जानें सब कुछ

Assembly Election 2026: अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि चुनाव में जमानत जब्त का क्या मतलब होता है, आखिर कैंडिडेट की जमानत कैसे जब्त हो जाती है, जानते हैं इसी का जवाब.

‘ये तो जमानत भी नहीं बचा पाए…’ चुनावों में कब होती है उम्मीदवार की जमानत जब्त, कैसे तय होती है रकम? जानें सब कुछ
Source/AI/Canva
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Assembly Election 2026: पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में किस पार्टी को क्या हासिल हुआ? इसका फैसला आज यानी 4 मई को होने जा रहा है. तमाम एग्जिट पोल ने जो नतीजे दिखाए थे, वो असल में कितने सही साबित होंगे, कुछ ही देर में साफ हो जाएगा. कौन हारा, कौन जीता के साथ एक चर्चा उनकी भी होगी जो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि चुनाव में जमानत जब्त का क्या मतलब होता है, आखिर कैंडिडेट की जमानत कैसे जब्त हो जाती है, चलिए जानते हैं इसी का जवाब. 

जमानत शब्द अक्सर कानूनी, आपराधिक और पुलिसिया कार्रवाई के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन चुनाव में भी ये शब्द काफी सुनाई देता है. दरअसल, किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए एक तय राशि चुनाव आयोग को जमा करवानी होती है. इसी राशि को जमानत राशि कहते हैं. 

कैसे जब्त होती है जमानत और कितनी देनी होती है रकम? 

जब किसी पार्टी या निर्दलीय उम्मीदवार औसत वोटों से भी कम हासिल करता है तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है. चुनाव आयोग के मुताबिक, जब कोई उम्मीदवार सीट पर पड़े कुल वोटों का 1/6 यानी 16.66% वोट हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है. इसे ऐसे समझ सकते हैं, मान लीजिए किसी सीट पर 1 लाख वोट पड़े हैं और वहां कई उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है, किसी एक या एक से ज्यादा उम्मीदवार को 16,666 से कम वोट मिले हैं तो उनकी जमानत जब्त मानी जाएगी. 

जमानत राशि अलग-अलग चुनाव में अलग होती है. भारत में राष्ट्रपति से लेकर विधानसभा चुनावों तक कैंडिडेट को जमानत राशि देनी होती है. 

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राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में जमानत राशि: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में सभी वर्गों के लिए जमानत राशि 15 हजार होती है. 

लोकसभा चुनाव: लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार की जमानत राशि वर्गों के हिसाब से अलग-अलग होती है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 25 हजार रुपए जमानत के भरने होते हैं, जबकि SC-ST कैंडिडेट को 12,500 रुपए जमानत के जमा करने होते हैं. 

विधानसभा चुनाव: राज्यों के चुनाव में भी लोकसभा वाला फॉर्मूला ही लगता है, यानी सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए जमानत राशि अलग और SC-ST के कैंडिडेट के लिए अलग राशि होती है. विधानसभा चुनाव में जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट को 10 हजार जमानत राशि देनी होती है, जबकि SC-ST वर्ग को 5 हजार रुपए जमानत के तौर पर देना होता है. 

लोकसभा और विधानसभा चुनाव की जमानत राशि का जिक्र रिप्रेंजेंटेटिव्स ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1951 में है. जबकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की जमानत राशि का जिक्र प्रेसिडेंट एंड वाइस प्रेसिडेंट इलेक्शन एक्ट, 1952 में किया गया है.  

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क्या तय वोट हासिल करने के बाद लौटाई जाती है जमानत राशि? 

उम्मीदवार 1/6 से ज्यादा वोट हासिल कर लेता है तो उसे जमानत राशि वापस लौटा दी जाती है. इससे कम वोट मिलने पर रकम नहीं लौटाई जाती, इसलिए इसे जमानत जब्त कहा जाता है. 

यह भी पढ़ें- विधानसभा चुनाव: मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन ले जाने को लेकर क्या कहता है नियम, किस जगह रखें अपना फोन, जानें

वहीं, वोटिंग से पहले किसी उम्मीदवार की मौत हो गई तो इस केस में भी उसके परिवार को जमानत राशि लौटा दी जाती है. इसके अलावा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने पर भी उसकी जमानत राशि लौटा दी जाती है. 

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