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पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद क्या होने वाला है? तैनात रहेंगी केंद्रीय सुरक्षा बलों की 500 कंपनियां, जानें EC का बड़ा प्लान
4 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में CAPF की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी. यह फोर्स बंगाल में चुनाव आयोग के अगले आदेश तक तैनात रहेगी.
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West Bengal Election: आगामी 9 अप्रैल से पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, लेकिन सबसे ज्यादा सरगर्मी पश्चिम बंगाल चुनावों की है. जहां चुनाव से पहले हिंसा के इतिहास को देखते हुए चुनाव आयोग पहले से सतर्क और मुस्तैद है. चुनाव आयोग ने इस बार भी हिंसा को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. बंगाल में चुनाव और चुनाव नतीजे आने के बाद भी भारी सुरक्षा फोर्स तैनात रहेंगी.
4 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में CAPF की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी. यह फोर्स बंगाल में चुनाव आयोग के अगले आदेश तक तैनात रहेगी.
क्या है बंगाल में चुनाव आयोग का प्लान?
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पश्चिम बंगाल में अभी 2400 CAPF कंपनिया तैनात हैं. एक कंपनी में 80 से 100 जवान होते हैं. 29 अप्रैल को चुनाव खत्म होने के बाद 1700 कंपनियां हटा दी जाएंगी और 500 बंगाल में ही रहेंगी. जो काउंटिंग होने तक और उसके बाद भी बंगाल में तैनात रहेंगी. ये कंपनियां स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा से लेकर पोलिंग बूथ और सेंसिटिव जोन की निगरानी करेंगी.
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चुनाव आयुक्त ने क्या निर्देश जारी किए?
CEC ज्ञानेश कुमार ने बंगाल चुनाव अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि चुनाव सुरक्षित और बेखौफ माहौल में हों. उन्होंने कहा है कि अधिकारी सुनिश्चित करें कि चुनाव फर्जी वोटिंग, लालच, धमकी और हिंसा मुक्त हों.
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दरअसल, साल 2021 में बंगाल विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा की वारदात दर्ज की गई थीं. कुल 1970 हिंसा के मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से हत्या से जुड़ी 29 शिकायतें, यौन उत्पीड़न के 12 मामले, गंभीर चोट के 391 मामले, तोड़फोड़ और आगजनी के 940 मामले और 562 शिकायतें अपराधिक धमकी से जुड़ी थी.
इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने 1345 आरोपियों को अरेस्ट किया था. हालांकि NHRC ने जांच में पाया कि उस समय केस की जांच सही से नहीं की गई. लगभग 60% मामलों में FIR ही नहीं दर्ज की गई. उस समय पुलिस पर सरकार की मिलीभगत के आरोप लगे. ऐसे में इन चुनावों में सुरक्षा चाक चौबंद करने, आपराधिक वारदातों को रोकने और ठोस कानूनी कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बल पहले से ही मुस्तैद हैं.
जब सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा संज्ञान
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पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले भी तनाव कम नहीं है. यहां हाल ही में मालदा जिले के कालियाचक इलाके में SIR प्रक्रिया के तहत काम कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने कई घंटों तक घेर लिया था. ये अधिकारी मतदाता सूची में नामों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन का काम कर रहे थे. अचानक सैकड़ों की संख्या में लोग BDO कार्यालय के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनका आरोप था कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अधिकारी कार्यालय के भीतर ही फंसे रह गए. बताया गया कि इन अधिकारियों में चार महिलाएं भी शामिल थीं. यह विरोध देर रात तक चलता रहा और प्रशासन को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.
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इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने का सीधा प्रयास है और इससे न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक योजनाबद्ध और प्रेरित कदम था. चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें आधी रात में आदेश जारी करना पड़ा, जो अपने आप में इस घटना की गंभीरता को दिखाता है.