ममता बनर्जी का इस्तीफे से साफ इनकार, चुनाव आयोग ने भी झाड़ा पल्ला, जानें अब राज्यपाल के पास क्या हैं विकल्प
West Bengal Politics: ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार और चुनाव आयोग के बयान के बाद अब राज्य में संवैधानिक संकट के समाधान के लिए सबकी नजरें राज्यपाल के कड़े फैसलों पर टिकी हैं.
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहीं निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए जनादेश पर सवाल उठाए हैं. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बुधवार को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की भूमिका केवल चुनाव कराने और परिणाम अधिसूचित करने तक सीमित है, इसके आगे की प्रक्रिया पूरी तरह संविधान के तहत होती है.
ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर बंगाल के CEO ने क्या कहा?
ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के सवाल पर उन्होंने कहा, “देखिए, संविधान में जो लिखा है वही होगा. हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं है. इस पर मेरी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं. चुनाव आयोग की इसमें कोई भूमिका नहीं है”. प्रक्रिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत निर्वाचन आयोग विजयी उम्मीदवारों की वैधानिक अधिसूचना जारी करता है, तो उसे राज्यपाल को भेजा जाता है, जिसके बाद नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है.
पुरानी विधानसभा का कार्यकाल आज समाप्त हुआ
उन्होंने कहा, “हमें यह वैधानिक अधिसूचना राज्यपाल को देनी होती है, जिसमें बताया जाता है कि किस सीट पर कौन जीता है. इसके बाद नई विधानसभा का गठन होता है. पुरानी विधानसभा का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है, इसलिए नई विधानसभा बनेगी. इसके बाद विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और फिर राज्यपाल कार्यालय आवश्यक अधिसूचना जारी करेगा”.
ममता बनर्जी क्यों नहीं दे रही हैं इस्तीफा?
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनाव में बड़ा झटका लगा है और राज्य में उसका 15 साल का शासन समाप्त हो गया है. परिणामों के बावजूद ममता बनर्जी ने कहा है कि वह स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देंगी और आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम जनता की वास्तविक इच्छा को नहीं दर्शाते.
ममता के इस्तीफा न देने पर राज्यपाल के पास क्या विकल्प?
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ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार करने के सवाल पर कानून के जानकारों का मानना है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राज्यपाल विधानसभा को बर्खास्त कर सकते हैं और सरकार का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो जाएगा क्योंकि 5 साल का मैंडेट खत्म हो गया है. अगर ममता बनर्जी खुद इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल के पास संविधान के नियमों के मुताबिक, सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार है.
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