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जोरहाट सीट पर बुरी तरीके से हारे गौरव गोगोई, भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी छठी बार बने विधायक, असम में कांग्रेस का पत्ता साफ

बता दें कि हितेंद्र नाथ गोस्वामी जोरहाट सीट से छठी बार विधायक बने हैं. असम के सबसे अहम शहरी केंद्रों में शामिल जोरहाट सिर्फ आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली सीट है. यहां का चुनावी इतिहास करीबी मुकाबलों, बदलते जनादेश और बड़े नेताओं की टक्कर के लिए जाना जाता है.

जोरहाट सीट पर बुरी तरीके से हारे गौरव गोगोई, भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी छठी बार बने विधायक, असम में कांग्रेस का पत्ता साफ
ImageSource/X/GauravGogai
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असम में भाजपा प्रचंड जीत की तरफ बढ़ रही है. पूर्ण बहुमत के साथ फिर से हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार बनने जा रही है. दोपहर 3 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 93 सीटों पर आगे चल रही है और 4 सीटों के नतीजे आ चुके हैं. इनमें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई की जोरहाट विधानसभा का भी रिजल्ट फाइनल हो गया है. जहां भाजपा उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने बंपर जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार गौरव गोगोई को 23,182 वोटों से हरा दिया है. भाजपा नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी को कुल 69,439 वोट प्राप्त हुए, वहीं गौरव गोगोई को 46,257 मत मिले. असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में सभी 126 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए थे. बता दें कि जोरहाट सीट असम की हॉट सीटों में से एक है. 

हितेंद्र नाथ गोस्वामी छठी बार बने विधायक 

बता दें कि हितेंद्र नाथ गोस्वामी जोरहाट सीट से छठी बार विधायक बने हैं. असम के सबसे अहम शहरी केंद्रों में शामिल जोरहाट सिर्फ आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली सीट है. यहां का चुनावी इतिहास करीबी मुकाबलों, बदलते जनादेश और बड़े नेताओं की टक्कर के लिए जाना जाता है.

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अनारक्षित है जोरहाट विधानसभा सीट 

जोरहाट विधानसभा सीट एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है. यह जोरहाट जिले में आती है. जो जोरहाट लोकसभा क्षेत्र के 10 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. बता दें कि जोरहाट सीट का गठन 1951 में हुआ था. तब से अब तक यहां 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इस दौरान कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 7 बार जीत दर्ज की है. वहीं असम गण परिषद (एजीपी) को 3 बार सफलता मिली है, जबकि भाजपा को 3 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2 बार जीत हासिल की है. इसके अलावा जनता पार्टी को भी यहां एक बार जीत मिली थी.

दो नेताओं के इर्द-गिर्द रहता है जोरहाट सीट का चुनाव 

जोरहाट सीट का चुनावी इतिहास दो नेताओं हितेंद्र नाथ गोस्वामी और राणा गोस्वामी की प्रतिद्वंद्विता के बिना अधूरा है. हितेंद्र गोस्वामी इस सीट पर लगभग 25 साल तक प्रभावशाली चेहरा रहे. उन्होंने एजीपी और बाद में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की. राणा गोस्वामी और हितेंद्र गोस्वामी के बीच 4 बार सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें दोनों ने दो-दो बार जीत हासिल की. इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस नेता गौरव गोगोई से हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी विजय यात्रा जारी रखी है. साल 2006 में राणा गोस्वामी ने कांग्रेस के टिकट पर 4,880 वोटों से जीत दर्ज की. 2011 में उन्होंने फिर हितेंद्र गोस्वामी को 37,971 वोटों से हराया. 2016 में समीकरण बदला और हितेंद्र गोस्वामी ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर राणा गोस्वामी को 13,638 वोटों से हराया. 2021 में दोनों फिर आमने-सामने हुए, जहां हितेंद्र गोस्वामी ने 6,488 वोटों के अंतर से सीट बचाई.

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जोरहाट विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,48,280 मतदाता 

10 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, जोरहाट विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,48,280 पात्र मतदाता हैं. यह 2024 के 1,46,731 मतदाताओं से मामूली बढ़ोतरी है. हालांकि, 2019 की तुलना में मतदाताओं की संख्या में गिरावट देखी गई थी. उस समय यहां 1,75,267 वोटर दर्ज थे.

शहरी वोटरों का दबदबा 

जोरहाट सीट पर सामाजिक समीकरण भी चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति मतदाता 8.04 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति मतदाता 1.95 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता 7 प्रतिशत से कम हैं. यहां शहरी वोटरों का दबदबा है. शहरी मतदाता 64.87 प्रतिशत और ग्रामीण मतदाता 35.13 प्रतिशत है. यही कारण है कि विकास, सड़क, व्यापार, रोजगार और नागरिक सुविधाएं यहां बड़े चुनावी मुद्दे रहते हैं.

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असम की सांस्कृतिक राजधानी है जोरहाट 

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जोरहाट को असम की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है. यह शहर साहित्य, संगीत, रंगमंच और पारंपरिक असमिया संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है. असम साहित्य सभा का मुख्यालय, बिहू उत्सव, सत्रिया नृत्य परंपरा और कई सांस्कृतिक संस्थानों ने इसे अलग पहचान दी है. ब्रिटिश काल में यह चाय उद्योग का बड़ा केंद्र बना. आज भी चाय बागान, कृषि, व्यापार, शिक्षा और छोटे उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.

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