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कौन हैं झंडू कुमार? बीमारी से लड़ाई के बीच सब्जी बेची, ई-रिक्शा चलाया, अब भारत के लिए जीता पहला मेडल, फैन हुए PM मोदी

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है. उन्होंने 190 किलोग्राम की बेस्ट लिफ्ट के साथ 130.9 अंक हासिल किए. इस शानदार उपलब्धि पर PM मोदी ने उन्हें बधाई दी है.

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25 Jul 2026
( Updated: 25 Jul 2026
01:27 PM )
कौन हैं झंडू कुमार? बीमारी से लड़ाई के बीच सब्जी बेची, ई-रिक्शा चलाया, अब भारत के लिए जीता पहला मेडल, फैन हुए PM मोदी
Image Source- IANS/Biplab Banerjee
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने भारत को पहला मेडल दिलाया. पैरा पावरलिफ्टर ने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. झंडू को देश के लिए पहला मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है. 

आज भारत में दुनिया का झंडा बुलंद करने वाले झंडू कुमार का ग्लासको तक पहुंचने की सफर कांटों भरा रहा है. इस खिलाड़ी ने पोलियों जैसी बीमारी का सामना किया, लेकिन इसे कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बना ली. उनका जीवन आसान नहीं रहा, झंडू कुमार ने आर्थिक तंगी देखी, परिवार ने सब्जी बेचकर गुजारा किया, लेकिन एक समय आया जब पेट भरने का ये इकलौता सहारा भी छिन गया. इसके बाद झंडू कुमार ने ई रिक्शा का हैंडल थाम लिया और परिवार की गाड़ी को आगे बढ़ाया. 

कोविड 19 में बंद हुई सब्जी की दुकान 

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बिहार के नालंदा के रहने वाले 28 वर्षीय झंडू कुमार कहते हैं, मैंने अपना गुजारा करने के लिए ई-रिक्शा चलाया, सब्जियां बेचीं और बहुत संघर्ष किया. हालांकि मैंने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा. मुझे हमेशा विश्वास था कि एक दिन मैं अपने देश के लिए जरूर मेडल जीतूंगा.’

कोविड-19 महामारी के दौरान झंडू कुमार की रोजी रोटी का जरिया सब्जी की दुकान भी बंद हो गई. इससे परिवार को बड़ा झटका लगा. इसके बाद झंडू कुमार ने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और ई रिक्शा चलाना शुरू किया. इन सबके बीच झंडू कुमार ने पढ़ाई नहीं छोड़ी, जिम में कई घंटे तक प्रैक्टिस जारी रखी, क्योंकि लक्ष्य सिर्फ एक था, देश के लिए मेडल जीतना. 

पैरा पावरलिफ्टिंग के लिए ई-रिक्शा बेचा 

कड़ी मेहनत के बावजूद दिनभर की कमाई महज 400-500 रुपए होती, जबकि परिवार का खर्चा और झंडू कुमार के प्रोटीन सप्लीमेंट का खर्चा इससे दोगुना था. साल 2023 में झंडू कुमार ने राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने के लिए अपना ई रिक्शा भी बेच दिया. हालांकि किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया और वह सफलता हासिल नहीं कर सके. इसके बावजूद झंडू कुमार ने अपनी कोशिश नहीं छोड़ी. 

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मेडल जीतने के बाद झंडू कुमार ने क्या कहा? 

झंडू कुमार ने कहा कि यह मेडल सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का भी है जिन्होंने मुश्किल समय में उन पर भरोसा बनाए रखा. झंडू के अनुसार, यह सफलता उन्हें भविष्य में भारत के लिए बड़े मंचों पर और सफलता पाने के लिए प्रेरित करेगी. संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने गोल्ड तो इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया.

उनकी इस गौरवशाली सफलता का जश्न न केवल पूरा बिहार मना रहा है बल्कि देशभर में खुशी की लहर है. PM मोदी ने झंडू कुमार को बधाई देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन. उन्होंने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए मेडल का खाता खोला है, उन्हें बधाई. उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और बरसों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है. हर चुनौती का सामना करते हुए और इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है.’

खेल मंत्री ने भी दी बधाई 

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी झंडू को ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर बधाई दी. उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ‘भारत के लिए ब्रॉन्ज, झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में 190 किलोग्राम का जबरदस्त लिफ्ट करके भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पहला मेडल जीता, पूरे देश को उन पर गर्व है.’

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