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बंदूकें छोड़ बनाई नई पहचान... जब रैंप पर उतरीं बस्तर के ’लाल आतंक' से निकलीं महिलाएं, हैरान रह गई पूरी दुनिया
रैंप पर बेधड़क, बेखौफ और कॉन्फिडेंस के साथ वॉक करती ये महिलाएं कोई मॉडल नहीं हैं बल्कि बस्तर के जंगलों से निकले वो चेहरे हैं जिनकी दुनिया कभी हथियार, बारूद और बगावत तक सिमटी थी, जिन्होंने अपनी पहचान नक्सली और माओवादी की बना ली थी.
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विद्रोह का शोर… गोलियों का धुआं… जंगल-जंगल खूनी खेल… कुछ साल पहले तक बस्तर की यहीं हकीकत थी. इस जगह को लाल आतंक का गढ़ कहा जाता था और जेहन में एक ही तस्वीर आती थी, नक्सली आतंक की, लेकिन अब जो तस्वीर सामने आई है उसे देख आंखों पर यकीन करना मुश्किल है, न केवल हमारे लिए, आपके लिए बल्कि उन लोगों के लिए भी जो इस तस्वीर का सेंटर पॉइंट थे. जिनकी ये तस्वीर थी.
बंदूकें छोड़ बनाई नई पहचान... जब रैंप पर उतरीं बस्तर के ’लाल आतंक' से निकलीं महिलाएं, हैरान रह गई पूरी दुनिया. बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने हथियार छोड़ रैंप पर किया वॉक. #Bastar #Naxal #Raipur pic.twitter.com/RcceA8iJX6
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 14, 2026
रैंप पर बेधड़क, बेखौफ और कॉन्फिडेंस के साथ वॉक करती ये महिलाएं कोई मॉडल नहीं हैं बल्कि बस्तर के जंगलों से निकले वो चेहरे हैं जिनकी दुनिया कभी हथियार, बारूद और बगावत तक सिमटी थी, जिन्होंने अपनी पहचान नक्सली और माओवादी की बना ली थी. जो सुरक्षाबलों पर भी बंदूकें तान लेती थीं. जो सरकार की नहीं सुनती थीं, बल्कि खुद अपनी सरकार चलाती थीं. लेकिन अब इनके हाथों में लाल आंतक की पहचान बंदूकें नहीं बल्कि लाल मेहंदी है, चेहरे पर बारूद की धूल नहीं बल्कि कॉन्फिडेंस का नूर है.
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मॉडल बनकर रैंप पर उतरीं पूर्व नक्सली महिलाएं
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दरअसल, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नेशनल हैंडलूम डे मनाया जा रहा था. जहां रैंप पर टॉप मॉडल्स नहीं सरेंडर कर चुकीं नक्सली महिलाएं थीं. स्टाइलिश लेकिन छत्तीसगढ़ का पारंपरिक परिधान पहनकर स्टेज पर उतरीं इन महिलाओं ने स्वैग के साथ रैंप पर वॉक किया तो पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा.
इन महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और हाथ से बुने गए खूबसूरत कपड़ों को बेहद ही खूबसूरती से कैरी किया था. इन्होंने स्टाइल और ग्रेस के साथ रैंप पर अपना जलवा बिखेरा.
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हथियार छोड़ चुकीं इन महिलाओं के लिए तो रायपुर आना भी किसी बड़ी ट्रिप से कम नहीं था. इन्हें रिहैबिलिटेशन सेंटर से रायपुर बुलाकर बकायदा मॉडल से ट्रेनिंग दिलाई गई. एक हफ्ते का ग्रूमिंग और ट्रेनिंग प्रोग्राम था. जो निखरकर कुछ इस तरह का दिखा.
फैशन शो नहीं बदलाव की कहानी बना इवेंट
नेशनल हैंडलूम डे पर आयोजित ये फैशन शो न केवल पारंपरिक हथकरघा कला को बढ़ावा देने का एक इवेंट बन गया. बल्कि इन पूर्व नक्सली महिलाओं की मौजूदगी और आत्मविश्वास ने इसमें एक मिसाल कायम कर दी.
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इस मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन महिलाओं से मुलाकात की. उनके ट्रांसफोर्मेंशन को सराहा और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. इस फैशन शो का मकसद इन महिलाओं को मंच पर लाने के साथ-साथ उन्हें स्किल से जोड़ना भी था.
A new chapter is unfolding in Bastar - one of peace, progress and possibilities.
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 13, 2026
The Bastar of hope, opportunity and aspiration is now taking centre stage.
Hands that once held weapons are today weaving a new story of dignity, confidence and hope.
From violence to opportunity,… https://t.co/D2th5IRuO1
21 मार्च 2025 को गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में ऐलान किया था कि देश से नक्सलियों की जड़ें उखड़ जाएंगी. उनका ये ऐलान न केवल नकस्लियों के खात्मे तक था बल्कि सरेंडर कर चुके माओवादियों को मुख्य धारा से जोड़ने, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने, उनको नई पहचान देने से था. आज इस बदलाव की कहानी रैंप पर वॉक करतीं ये महिलाएं खुद कह रही हैं. बात यहीं पर खत्म नहीं होती है बस्तर के पूर्व नक्सली अब नए-नए हुनर सीख रहे हैं. महिलाएं घरेलू उद्योग से जुड़ रही हैं.
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सरकार का एंटी नक्सल मूवमेंट माओवादियों के सरेंडर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने माओवादियों के दुनिया देखने का अंदाज और तरीका ही बदल दिया. एक जिंदगी जो पूरी तरह से ग्रूम हो चुकी थी. महिलाओं की एक वॉक में हथियारों से लेकर हुनर तक की कहानी दर्शाई गई थी. कभी माओवादी, नक्सली कहे जानें वाली ये महिलाएं अब फैशन आइकन बनकर दुनियाभर में छा गईं.