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पेपर लीक के खिलाफ ही लड़कर चमकाई थी राजनीति, अब ऐसा घूमा पहिया, देना पड़ा इस्तीफा, जानें धर्मेंद्र प्रधान की कहानी
NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छिड़़े संग्राम के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. इसी के साथ छात्रों का आंदोलन भी खत्म हो गया, लेकिन एक समय था जब धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में खुद लाठियों का सामना किया था.
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Political History of Dharmendra Pradhan: पिछले कुछ महीनों से देश में एक नाम सबसे ज्यादा लिया गया. वो हैं धर्मेंद्र प्रधान. सड़कों से लेकर संसद तक इस नाम की गूंज रही, लेकिन विरोध के रूप में, विपक्ष से लेकर देश के छात्रों ने एक ही मांग की. ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा.’ उनके इस्तीफे की मांग को लेकर 36 दिन से छात्र दिल्ली के जंतर मंतर पर जमा रहे, आखिरकार उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं धर्मेंद्र प्रधान खुद भी छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं.?
NEET पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों का प्रदर्शन तेज हुआ और शिक्षा मंत्री ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, वे बीते 4 दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं. उन्होंने कहा, मैं जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ रहा.
जानें धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर
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ओडिशा के अनुगुल जिले में 26 जून 1969 को जन्में धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं. इसके साथ ही वे संगठन में भी अहम जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं. धर्मेंद्र प्रधान को राजनीति विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने खुद जमीन पर उतरकर पार्टी को मजबूत किया और अपनी पहचान बनाई. धर्मेंद्र प्रधान के पिता देबेंद्र प्रधान अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं. राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के कारण धर्मेंद्र प्रधान ने राजनीति की ABCD घर से ही सीखी. साथ ही साथ सामाजिक मुद्दों को भी गंभीरता से समझा.
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छात्र राजनीति में सक्रिय रहे, खाई लाठी
धर्मेंद्र प्रधान की शुरुआती पढ़ाई ओडिशा में ही हुई. इसके बाद वे हायर स्टडीज के लिए राजधानी भुवनेश्वर चले गए. छात्र जीवन में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ गए थे. साल 1985 में धर्मेंद्र प्रधान तालचर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए. फिर उत्कल विश्वविद्यालय में भी छात्र राजनीति का दमदार चेहरा बनकर उभरे. ABVP में रहते हुए प्रधान ने छात्रों के मुद्दों को राज्य से लेकर राष्ट्र स्तर तक मजबूती से उठाया. इस दौरान वह छात्रों के मुद्दों से जुड़े कई प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहे.
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पेपर लीक के खिलाफ किया था प्रदर्शन
साल 2021 में द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान ने 1997 में स्वर्गीय जेबी पटनायक की सरकार में ओडिशा में हुए एक पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किया था. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से उन्होंने राज्य सचिवालय के सामने किए प्रदर्शन किया था. इस दौरान उन्होंने पुलिस लाठीचार्ज का भी सामना किया. वह इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया था.
BJP के साथ शुरू किया चुनावी सफर
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छात्र आंदोलन से निकलकर धर्मेंद्र प्रधान धीरे-धीरे मुख्य धारा की राजनीति में एक्टिव होने लगे. BJP के साथ जुड़कर साल 2000 में उन्होंने ओडिशा विधानसभा चुनाव में पल्लाहड़ा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए.
विधायक रहते हुए ही उन्होंने पार्टी संगठन में अपनी पकड़ को और मजबूत किया. राज्य की राजनीति में रहते हुए ही उन्होंने केंद्र की राजनीति में कदम रखे. जब साल 2004 में प्रधान ने ओडिशा की देवगढ़ संसदीय सीट से सांसदी लड़ी और जीत दर्ज की.
साल 2014 में मोदी सरकार में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई.
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2017 में धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया.
2021 में मोदी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के दौरान प्रधान को देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई.
वे बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे. कई साल तक राज्यसभा से संसद का प्रतिनिधित्व किया. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से उन्होंने जीत दर्ज की. इसके बाद NDA सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय सौंपा.
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मंत्रालय की जिम्मेदारी के साथ-साथ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक कुशल रणनीतिकार की भूमिका भी निभाई. ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार समेत कई राज्यों में BJP के चुनाव जिताने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई.