Advertisement
'रूस से खरीदते रहेंगे तेल...', ट्रंप की 100% टैरिफ की धमकी पर भारत का दो टूक जवाब; जानें पूरा मामला
अमेरिका भारत पर 100 फ़ीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है. इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने दो टूक संदेश दिया है. मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा जरूरतों के मुताबिक रूस से तेल खरीद जारी रहेगी.
Advertisement
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है. अमेरिका में ऐसा कानून आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को इस बिल ने अहम प्रक्रियात्मक चरण पार कर लिया और अब बुधवार, 16 सितंबर को अंतिम वोटिंग प्रस्तावित है. हालांकि, बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर उसी समय 100 फीसदी टैरिफ लागू हो जाएगा. इसके बाद टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा.
क्या है यह पूरा मामला?
इस कानून का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है. अमेरिकी सीनेट इसे पहले ही 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दे चुकी है. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कानून का एक अहम हिस्सा रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर सख्त आर्थिक दबाव बनाने से जुड़ा है. प्रस्तावित प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को ऐसे देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. शुरुआती सीनेट संस्करण में किसी देश का नाम सीधे नहीं लिखा गया था. लेकिन हाउस में पेश किए गए संशोधनों में भारत समेत कई देशों को संभावित टैरिफ के दायरे में रखने की कोशिश की गई है. रिपोर्टों के मुताबिक भारत, चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई प्रमुख रूसी ऊर्जा खरीदारों का नाम इस बहस में सामने आया है.
Advertisement
यह भी पढ़े: BRICS को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया बड़ा ऐलान, 19वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा ड्रैगन
Advertisement
भारत ने क्या कहा?
अमेरिकी दबाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है. इस मामले में दो टूक संदेश देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत की ऊर्जा खरीद उसकी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से निर्देशित होती है. उन्होंने साफ किया कि यही नीति आगे भी जारी रहेगी. भारत लंबे समय से कहता रहा है कि कच्चे तेल की खरीद में बाजार की स्थिति, उपलब्धता और देश की ऊर्जा सुरक्षा अहम भूमिका निभाती है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान देशों के तेल खरीदने या न खरीदने से नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और वार्ता से होना चाहिए.
Advertisement
यह भी पढ़े: BRICS से दूरी बनाकर पछता रहा बांग्लादेश? अब भारत से रिश्ते सुधारने को बेकरार तारिक रहमान!
यह भी पढ़ें
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव अमेरिकी हाउस की वोटिंग है. अगर विधेयक सदन से भी पारित होता है, तो उसके बाद कानून बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और राष्ट्रपति के पास टैरिफ संबंधी अधिकार आने की स्थिति बनेगी. इसलिए भारत पर 100 फीसदी शुल्क लगना अभी एक संभावित कदम है, तत्काल लागू हो चुका फैसला नहीं. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका कितना असर पड़ता है.