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जिन पाक आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को मारा, वहां इंडियन आर्मी ने नमाज के वक्त क्यों रोका ऑपरेशन सिंदूर?

ऑपरेशन सिंदूर पर सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने बताया कि नमाज के वक्त पाकिस्तान पर स्ट्राइक नहीं की गई. जबकि टारगेट सेट थे.

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पहलगाम अटैक के बाद पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरे हो गए हैं. आतंक के खिलाफ इस बड़े ऑपरेशन की चर्चा आज भी होती है. अब आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है. 

आर्मी चीफ ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने नमाज के समय कोई स्ट्राइक नहीं की. ऐसा इसलिए क्योंकि हमारा मानना ये है कि ‘सबका मालिक एक’ है. 

नमाज के वक्त ऑपरेशन सिंदूर क्यों रोका? 

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया. उन्होंने कहा, 

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‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हम उस समय अटैक नहीं करते थे जब दूसरी तरफ लोग नमाज पढ़ रहे होते थे. हमारा मानना है कि सबका का मालिक एक है.’

सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारतीय सेना युद्ध के हालात में भी संयम, सम्मान और इंसानियत का परिचय देती है. जनरल द्विवेदी ने कहा, सेना केवल रणनीति के आधार पर ही नहीं, बल्कि मानवीय और नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर भी कार्य करती है. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया. 

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आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि ऑपरेशन के दौरान लक्ष्य को नष्ट करने के लिए समय (टाइमिंग) पूरी तरह उनके नियंत्रण में था, लेकिन उन्होंने एक खास समय पर हमला नहीं करने का फैसला लिया. 

उन्होंने बताया कि जब हमें इन लक्ष्यों को नष्ट करना था, तो समय दो बजे, चार बजे यानी कभी भी हो सकता था, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि जब आतंकवादी शिविर में दूसरी तरफ के लोग अपनी नमाज अदा कर रहे हों, तो हम उस समय कोई कार्रवाई न करें. इसीलिए हमने ऐसा समय चुना, जब हमें पता था कि वे नमाज नहीं पढ़ रहे होंगे. नमाज के दौरान अटैक न करने के पीछे हमारा मानना है कि सबका का मालिक एक है. 

पहले जैसे नहीं रहे युद्ध- सेना प्रमुख


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इस इंटरव्यू में आर्मी प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने युद्ध की बदलती संरचना और स्वरूप पर भी बात की. उन्होंने कहा, पहले के युद्ध में जहां सिर्फ जमीन पर सैनिक आमने-सामने लड़ते थे, लेकिन आज का युद्ध कई क्षेत्रों में एक साथ लड़ा जाता है. इनमें जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना और सोच पर असर डालने वाला क्षेत्र भी है. सेना प्रमुख ने कहा, इन सभी को मिलाकर मल्टी-डोमेन कहा जाता है. 

उन्होंने कहा, जमीन पर गोलीबारी होते हैं, तो दूसरी ओर साइबर हमले भी एक्टिव रहते हैं. दुश्मन की संचार व्यवस्था को भी बाधित या प्रभावित करना जरूरी है. उन्होंने जोर दिया कि आज के सैन्य कमांडर केवल एक अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकते. उन्होंने युद्ध में तकनीकी समझ को आज के समय में बेहद जरूरी बताया. 

‘आज की दुनिया एक तरह के लगातार चलने वाले संघर्ष के दौर में है. यह जरूरी नहीं है कि हर बार युद्ध आधिकारिक रूप से घोषित हो, लेकिन अलग-अलग जगहों पर, अलग-अलग तरीकों से टकराव चलता रहता है. ऐसे माहौल में सबसे अहम बात यह है कि इन सभी क्षेत्रों के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए.’

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मानवीय जुड़ाव पर क्या कहा? 

इंटरव्यू में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बेटियों से जुड़े सवाल पर कहा, मेरी बेटियों ने मुझे सिखाया कि आपको किसी से बातचीत करने के लिए अपने स्तर से नीचे आना पड़ता है. आप हमेशा छह फीट ऊंचे नहीं रह सकते. बेटियां उन्हें भारतीय सेना में सामाजिक और कार्यस्थल से जुड़े बदलावों के लिए प्रेरित करती हैं. जो अधिकार के साथ-साथ मानवीय जुड़ाव को भी तरजीह देती हैं. 

पहलगाम अटैक के बाद सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को दिया था अंजाम

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22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में पहलगाम की बैसरन घाटी में बड़ा आतंकी हमला हुआ था. जहां निहत्थे पर्यटकों पर आतंकियों ने गोलियां बरसाईं. इस हमले में 26 लोग मारे गए हैं. 

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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आतंकियों ने लोगों से नाम पूछा, धर्म की पहचान की, कलमा पढ़ने के लिए कहा और जब ऐसा नहीं कर पाए तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया. इस कत्लेआम का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया. ऑपरेशन सिंदूर में आतंक के आका मारे गए और पाकिस्तानी हुकूमत आंसू बरसाती रही, लेकिन इस दौरान भी भारतीय सेना ने धर्म पर अटैक नहीं किया. इसीलिए नमाज के दौरान स्ट्राइक नहीं की गई. 

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