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SIR में कौनसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ? RTI में चुनाव आयोग से पूछा गया सवाल, जवाब देने से EC ने किया इंकार
आयोग से राइट टू इन्फोर्मेशन (RTI) के तहत सॉफ्टवेयर की जानकारी मांगी गई थी. इसके जवाब में कहा गया कि यह जानकारी ट्रेड सीक्रेट और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी है.
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चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों और SIR के दौरान लाखों वोटर्स के नाम काटे जाने के विवाद के बीच इलेक्शन कमीशन के एक और फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग से राइट टू इन्फोर्मेशन (RTI) के तहत सॉफ्टवेयर की जानकारी मांगी गई थी. इसके जवाब में कहा गया कि यह जानकारी ट्रेड सीक्रेट और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी है. इसे RTI कानून के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.
AI के इस्तेमाल की भी जानकारी नहीं मिली
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चुनाव आयोग ने यह भी साफ नहीं किया कि SIR के प्रोसेस में क्या AI का इस्तेमाल किया गया था? किसी सॉफ्टवेयर या मशीन लर्निंग के बारे में भी नहीं बताया गया. तेलंगाना के सामाजिक कार्यकर्ता एमए मुजीब अय्यूब ने RTI दायर कर चुनाव आयोग से पांच सवाल पूछे थे. जिसमें सॉफ्टवेयर की जानकारी भी मांगी गई थी.
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चुनाव आयोग से कौन से 5 सवाल पूछे गए थे?
वोटर लिस्ट की जांच के लिए किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया? उसका नाम और वर्जन क्या है?
क्या सिस्टम अपने आप गलत या संदिग्ध वोटर रिकॉर्ड की पहचान करता है? क्या वह ऐसे रिकॉर्ड को जांच के लिए अलग करता है?
क्या वोटर लिस्ट की जांच में AI या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया गया? क्या इसमें प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का भी इस्तेमाल हुआ?
अगर सॉफ्टवेयर किसी वोटर के रिकॉर्ड को गलत चिह्नित कर दे, तो ऐसी गलती से बचने के लिए क्या इंतजाम हैं?
सॉफ्टवेयर जिन रिकॉर्ड को जांच के लिए अलग करता है, उनकी समीक्षा या मंजूरी कौन-सा अधिकारी देता है?
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इनमें से ज्यादातर सवालों को तो चुनाव आयोग ने यह कहकर चलता कर दिया कि यह RTI के दायरे में आते ही नहीं है. सॉफ्टवेयर की जानकारी देने को लेकर आयोग ने कहा, RTI कानून की धारा (80(1)(d) के तहत यह ट्रेड सीक्रेट है. EC ने यह भी कहा कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर न बनाया गया न खरीदा गया.
सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी और सुधार के सवाल का भी चुनाव आयोग ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. इसके पीछे RTI कानून की धारा 2(f) का हवाला दिया गया. आयोग ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का फैसला संबंधित क्षेत्र का ERO तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है. इलेक्शन कमीशन ने इसमें सॉफ्टवेयर की कितनी भूमिका है इस पर जवाब नहीं दिया.
विपक्ष का विरोध जारी
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SIR में गड़बड़ियों और धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोला हुआ है. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की. वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी दिल्ली में प्रदर्शन किया. हालांकि प्रदर्शन से पहले ही पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास, और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया था.
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