तमिलनाडु में CM विजय की सरकार को झटका, मद्रास हाईकोर्ट से RSS को हरी झंडी, रूट मार्च निकालने की मिली इजाजत
तमिलनाडु की नई नवेली थलापति विजय की सरकार को बड़ा झटका लगा है. मद्रास हाईकोर्ट ने RSS को रूट मार्च निकालने की इजाजत दे दी है. इससे पहले सरकार ने 25 अक्टूबर और 2 नवंबर को राज्यभर में 128 जगहों पर जुलूस निकालने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था.
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) रविवार को चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में रूट मार्च निकालेगा. मद्रास हाईकोर्ट ने संगठन को 25 अक्टूबर और 2 नवंबर को राज्यभर में 128 जगहों पर जुलूस निकालने की इजाजत दी है. इसी आदेश के बाद रविवार का कार्यक्रम हो रहा है.
तमिलनाडु में विजय सरकार को हाई कोर्ट से झटका
रविवार के मार्च के लिए चेन्नई और उसके उपनगरीय इलाकों में सात जगहों को तय किया गया है. इनमें तिरुवोट्टियूर, कोलाथुर, एग्मोर, कोराट्टूर, अय्यप्पनथांगल, मेदावक्कम और क्रोमपेट शामिल हैं.
मद्रास हाई कोर्ट से RSS को मिली रूट मार्च की हरी झंडी!
ये जुलूस संगठन के सालाना विजयादशमी कार्यक्रमों का हिस्सा हैं, जिसमें वर्दी पहने स्वयंसेवक मार्च और जनसभाओं में हिस्सा लेते हैं. एग्मोर में जुलूस रविवार शाम 4 बजे रामदा होटल के पास से शुरू होगा और राजरत्नम स्टेडियम के पास खत्म होगा. संगठन के कार्यक्रम के अनुसार समापन स्थल पर एक जनसभा भी होगी.
कोलाथुर में मार्च दोपहर 3 बजे पेरावल्लूर में कामराज प्रतिमा के पास से शुरू होगा. संगठन ने अलग-अलग जुलूसों के लिए अलग समय और जगह तय की है, जहां प्रतिभागी मार्च शुरू होने से पहले इकट्ठा होंगे.
हाईकोर्ट की यह इजाजत आरएसएस के प्रदेश सचिव जगदीशन की याचिका पर आई है. राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रमों की मंजूरी न दिए जाने के बाद उन्होंने याचिका दायर की थी.
तमिलनाडु में RSS को 128 जगहों पर मार्च की इजाजत
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दो तय तारीखों पर 128 जगहों पर मार्च की इजाजत दे दी. संगठन ने अपने शताब्दी समारोह के तहत पूरे राज्य में इस कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी थी.
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आरएसएस की स्थापना विजयादशमी 1925 को हुई थी. 2025 में उसने 100 साल पूरे कर लिए हैं और अब वह देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रमों के जरिए अपनी दूसरी शताब्दी में प्रवेश का जश्न मना रहा है. विजयादशमी का संगठन के लिए खास महत्व है क्योंकि यह उसकी स्थापना का प्रतीक है.
इसके सालाना कार्यक्रमों में परंपरागत रूप से वर्दीधारी स्वयंसेवकों के जुलूस और फिर सभाएं शामिल होती हैं, जहां वक्ता प्रतिभागियों और समर्थकों को संबोधित करते हैं. आरएसएस के अनुसार तमिलनाडु में करीब सात दशकों से रूट मार्च आयोजित किए जा रहे हैं. हालांकि इन आयोजनों की अनुमति को लेकर पहले भी संगठन और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा है.
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DMK शासनकाल में भी RSS को खटखटाना पड़ा था कोर्ट का दरवाजा
पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल में भी अनुमति न मिलने के बाद संगठन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट तक की कार्यवाही के बाद न्यायिक मंजूरी मिलने पर ही मार्च निकाले गए थे.
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रविवार के कार्यक्रम हाईकोर्ट के ताजा आदेश के तहत होंगे. इस अनुमति के तहत बचे हुए जुलूस 2 नवंबर को निकाले जाएंगे, जिसके साथ 128 जगहों पर संगठन का तय कार्यक्रम पूरा होगा.