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‘जब चीनी सेनाएं तोड़ती हैं रूल…’, चीन सीमा पर भारत का बड़ा बयान, बताया कब बिगड़ते हैं हालात?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान उन्होंने भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती और तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया.
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि हालात तब बिगड़ते हैं जब चीनी सेनाएं गश्त के नियमों और तौर-तरीकों का उल्लंघन करती हैं.
उन्होंने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से अलग हटती है, तो सीमा क्षेत्रों की स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है.
LAC पर तनाव की स्थिति कब बनती है?
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी और किसी भी तरह की गलत गणना से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं.
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#WATCH | Delhi | MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "The situation in the India-China border areas gets disturbed from time to time when Chinese forces diverge from established patrolling patterns. Both sides continue to use existing diplomatic and military mechanisms to resolve outstanding issues and avoid misunderstanding and miscalculation along the line of actual control. The two sides have also agreed to discuss ways to improve understanding of LAC in appropriate areas for better border management. The maintenance of peace and tranquility in the border areas is essential for the overall development of bilateral relations."
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 23, 2026
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए एलएसी की समझ को बेहतर बनाने के तरीकों पर उचित क्षेत्रों में चर्चा करने पर भी सहमति जताई है. जायसवाल ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है.
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MEA का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीन और भारत के सैनिकों के बीच टकराव का अंदेशा जताया था. हालांकि MEA का बयान उनके दावे से जुड़ा है इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.
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शत्रुजीत कपूर ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ है और ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है. इस दौरान उन्होंने अपने शौर्य कमांडो के काम की सराहना भी की है. कपूर के मुताबिक, इन टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अच्छा काम किया है. हालांकि, सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं का जिक्र होने के बावजूद यह बताना जरूरी है कि हर फेसऑफ का मतलब गोलीबारी या युद्ध जैसी स्थिति नहीं होता. सीमा पर गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का सामना होने से भी तनाव पैदा हो सकता है.
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क्यों संवेदनशील है LAC का मुद्दा?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद नया नहीं है. वर्ष 2017 में डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रही थीं. इसके बाद जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे. इन घटनाओं ने साफ किया कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य सतर्कता और कूटनीतिक बातचीत दोनों जरूरी हैं. अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें भी इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा रही हैं.
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With IANS Input