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'मंदिर या मस्जिद नहीं चाहिए...', भोजशाला मामले में कोर्ट का फैसला सुनते ही मुस्लिमों का आया तगड़ा रिएक्शन

Bhojshala Case: इस फैसले के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि मंदिर या मस्जिद बनाने से समस्या का हल नहीं निकलेगा. उनके मुताबिक, इस जगह का धार्मिक विवाद खत्म करने के बजाय इसका उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाना चाहिए.

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18 May 2026
( Updated: 18 May 2026
09:51 AM )
'मंदिर या मस्जिद नहीं चाहिए...', भोजशाला मामले में कोर्ट का फैसला सुनते ही मुस्लिमों का आया तगड़ा रिएक्शन
Image Source: IANS
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Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजनशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने एसएसआई (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की 98 दिन चली सर्वेक्षण रिपोर्ट को सही ठहराया और यह तय किया कि भोजनशाला परिसर हिंदू मंदिर हैं. कोर्ट ने इसे वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित स्थल बताया. इस फैसले के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि मंदिर या मस्जिद बनाने से समस्या का हल नहीं निकलेगा. उनके मुताबिक, इस जगह का धार्मिक विवाद खत्म करने के बजाय इसका उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाना चाहिए.

मुस्लिम समुदाय की राय- अस्पताल बनाएं

भोपाल के एक मुस्लिम शख्स ने कहा, "उस जगह को न मंदिर बनाओ और न मस्जिद. अगर वहां अस्पताल बना दिया जाए, तो उससे अच्छी जगह और क्या होगा. वहां हर बीमार व्यक्ति आएगा और इलाज होगा. इसलिए बेहतर यही है कि अस्पताल बनाया जाए."
उनका यह भी कहना था कि मस्जिदें पहले से काफी हैं, लेकिन अस्पताल की कमी है. अगर अस्पताल बन जाए, तो हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्म के लोग वहां इलाज के लिए आ सकेंगे. उनके अनुसार, धार्मिक स्थल अस्पताल से बड़ा नहीं हो सकता, क्योंकि जीवन की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है.

स्कूल, कॉलेज या अस्पताल से मिल सकता समाधान

एक अन्य मुस्लिम युवक ने भी कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया. उन्होंने कहा, "मंदिर-मस्जिद की लड़ाई बहुत पहले से चली आ रही है. बीजेपी की सरकार आने के बाद यह दिक्कत और बढ़ गई है. जातिवाद बढ़ा है और हिंदू-मुस्लिम को आपस में लड़ाया जा रहा है. इसलिए मंदिर या मस्जिद बनाने के बजाय कोई स्कूल, कॉलेज या अस्पताल बनाया जाए, तो यह जगह हर धर्म के लोगों के लिए उपयोगी हो जाएगी." उनका मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सभी के लिए जरूरी हैं, इसलिए इस तरह के फैसले से समाज को ज्यादा फायदा होगा.

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एकता और भाईचारे की जरूरत

एक अन्य मुस्लिम शख्स ने कहा, "आजकल सारी लड़ाई मंदिर-मस्जिद के नाम पर हो रही है. इसलिए इस मामले में ऐसा हल निकाले जिससे हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश हो. हम हिंदू परिवारों के साथ एक मोहल्ले में रहते हैं और आज भी उनके साथ हमारी दोस्ती और भाईचारा है." उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्या का ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे मंदिर-मस्जिद का झंझट ही खत्म हो और लोग शांति से रहें.

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भोजशाला परिसर का मामला सिर्फ धार्मिक विवाद नहीं है, बल्कि यह समाज की प्राथमिकताओं और एकता का भी सवाल है. मुस्लिम समुदाय के लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन बचाने वाली सुविधाएं किसी धार्मिक स्थल से ज्यादा जरूरी हैं. इस तरह का दृष्टिकोण समाज में भाईचारे और शांति बनाए रखने में मदद कर सकता है.

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