जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

NCERT की कक्षा-9 की किताब में पढ़ाया जाएगा आपातकाल का इतिहास, छात्र जानेंगे इसकी पूरी कहानी

NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। नई पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

NCERT की कक्षा-9 की किताब में पढ़ाया जाएगा आपातकाल का इतिहास, छात्र जानेंगे इसकी पूरी कहानी
Image Credit: Gemini
Advertisement

भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 1975 का 'आपातकाल' एक ऐसा अध्याय है, जिसने देश के लोकतंत्र की दिशा बदल दी थी। इससे देश इस कदर प्रभावित हुआ था की इससे होने वाले प्रतिघात की गूँज आज भी सुनाई देती है। इस ऐतिहासिक घटना के लागू होने के करीब पांच दशक बाद, शिक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है।

NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। नई पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 

बच्चों को बताया जाएगा आपातकाल का इतिहास

एनसीईआरटी अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब कक्षा 9 के विद्यार्थियों को आपातकाल के इतिहास और उसके प्रभावों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

Advertisement

पुस्तक में लोकतंत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों पर आधारित अध्याय के अंतर्गत आपातकाल को शामिल किया गया है। इसमें उन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण जून 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था।

आपातकाल घोषित करने की वजह 

ज़्यादातर लोग 1975 की रात को लगाए गए आपातकाल के बारे में जानते हैं, लेकिन इसके पीछे की कहानी क्या थी? देश में अचानक क्या हालात बन गए थे कि इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा?

पाठ्यपुस्तक के अनुसार, 1970 के दशक की शुरुआत में देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और शासन व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ रहा था। इन कारणों से देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अशांति का माहौल बन गया था। इसी पृष्ठभूमि में जून 1975 में 'आंतरिक अशांति' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया।

किताब में बताया गया है कि इसके बाद 21 महीने तक देश में कई संवैधानिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए। प्रेस सेंसरशिप लागू की गई और कई विपक्षी नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इस दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं पर भी असर पड़ा।

Advertisement

जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी किया गया विशेष जिक्र

पाठ्यपुस्तक में लोकनायक के नाम से प्रसिद्ध वरिष्ठ नेता और समाज सुधारक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी विशेष जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने आपातकाल के विरोध में छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को एकजुट किया। खासतौर पर बिहार और गुजरात में उनके नेतृत्व में चले आंदोलनों ने लोकतांत्रिक सुधारों की व्यापक मांग को मजबूत किया।

किताब में यह भी बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद आम चुनाव कराए गए। चुनाव परिणामों ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को साबित किया, क्योंकि मतदाताओं ने मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त की और राजनीतिक बदलाव संभव हुआ।

Advertisement

आपातकाल के अलावा, नई पाठ्यपुस्तक में लोकतंत्र के सामने मौजूद आधुनिक चुनौतियों जैसे फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, गरीबी, क्षेत्रीय विभाजन, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता पर भी चर्चा की गई है। इसके साथ ही, 'डेमोक्रेसी एंड यू' नामक एक नया खंड जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका से परिचित कराना है।

यह भी पढ़ें

पुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका, मतदान प्रक्रिया, मतदाता भागीदारी, पंचायत व्यवस्था, महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी विस्तार से शामिल किया गया है।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें