Advertisement
तरुण तेजपाल ने गोवा कोर्ट में किया सरेंडर, 2013 रेप केस में 10 साल की सजा के बाद जेल भेजे गए
दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने गोवा कोर्ट में सरेंडर किया. इसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले सेंट्रल जेल ले जाया गया.
Advertisement
तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की एक अदालत में सरेंडर कर दिया. इसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले सेंट्रल जेल ले जाया गया. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 के रेप केस में उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसके कुछ हफ्ते बाद उन्होंने सरेंडर किया.
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को 62 वर्षीय पत्रकार को निर्देश दिया था कि वे अपनी सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करें.
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी तत्काल राहत की याचिका खारिज कर दी थी और स्पष्ट किया था कि सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने के बाद ही उनकी अपील पर विचार किया जाएगा. इसके बाद तेजपाल ने मापुसा में अतिरिक्त सत्र न्यायालय के समक्ष सरेंडर किया.
Advertisement
22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करने का निर्देश
Advertisement
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि सजा और 10 साल की कठोर कारावास की सजा को चुनौती देने वाली उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई तभी होगी, जब वे सरेंडर कर देंगे.
जस्टिस आलोक अराधे की एकल-न्यायाधीश पीठ ने तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और गोवा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया.
Advertisement
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा था बरी करने का फैसला
सिब्बल ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को तेजपाल को सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था. उन्होंने तर्क दिया कि शुरुआती छह महीनों को छोड़कर पूरी कार्यवाही के दौरान तेजपाल जमानत पर रहे हैं और अब वे एक वरिष्ठ नागरिक हैं.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अधिनियम 1970 का भी हवाला देते हुए तर्क दिया कि शीर्ष अदालत अपील के साथ-साथ छूट की याचिका पर भी गुण-दोष के आधार पर विचार कर सकती है.
Advertisement
याचिका का विरोध करते हुए एसजी मेहता ने कहा कि तेजपाल की अपील पर तब तक सुनवाई नहीं हो सकती जब तक कि वे या तो सरेंडर करके सरेंडर सर्टिफिकेट पेश न करें या सरेंडर से छूट न प्राप्त कर लें.
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी तर्क दिया कि 1970 के अधिनियम का हवाला देना गलत था, क्योंकि यह एक अस्थायी कानून था और अपीलीय क्षेत्राधिकार अब लागू वैधानिक प्रावधानों द्वारा शासित होता है.
पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस अराधे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की याचिका के खिलाफ फैसला किया है और उनके वकील से पूछा कि उन्हें सरेंडर करने के लिए कितना समय चाहिए.
Advertisement
सिब्बल ने दो हफ्ते का समय मांगा, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने अनुरोध को दर्ज किया और तेजपाल को उस अवधि के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया.
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि यदि 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल किया जाता है, तो मामले को उस तारीख को उनकी अपील के गुण-दोष पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रेप केस में तेजपाल को सुनाई गई 10 साल की कठोर कैद की सजा को बढ़ाया जाए.
6 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था और उन्हें भारतीय दंड संहिता के तहत रेप और अन्य अपराधों का दोषी ठहराया था.
Advertisement
इसके बाद जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की बेंच ने उन्हें 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई और सरेंडर करने के लिए समय दिया. तेजपाल को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक जूनियर सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में एक इवेंट के दौरान तेजपाल ने लिफ्ट के अंदर उनका यौन उत्पीड़न किया था.
Advertisement
गोवा पुलिस ने रेप समेत कई अपराधों के लिए तेजपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद नवंबर 2013 में एक स्थानीय अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2014 में उन्हें रेगुलर जमानत दे दी थी.
मई 2021 में सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा और जांच में कथित कमियों का भी जिक्र किया था.
Advertisement
यह भी पढ़ें
इसके बाद गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी और तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को समझने में गलती की थी.