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‘मलबे में दबे छात्र ने Video कॉल कर मांगी मदद…’, सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर DU साउथ कैंपस की प्रोफेसर का दावा
साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर राजनी अब्बी के एक बयान ने सबको चौंका दिया. उन्होंने बताया कि राहत-बचाव अभियान के दौरान मलबे के अंदर से उनके पास फोन कॉल आया.
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. NDRF की टीम मलबे में जिंदगीं की तलाश में जुटी हैं. यह बिल्डिंग दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास थी. जिसमें ज्यादातर DU के छात्र ही रहते हैं. इसी बीच एक चौंकाने वाला वाकया भी सामने आया.
दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर राजनी अब्बी के एक बयान ने सबको चौंका दिया. उन्होंने बताया कि राहत-बचाव अभियान के दौरान मलबे के अंदर से उनके पास फोन कॉल आया. एक छात्र ने तो दबी हुई हालत में वीडियो कॉल किया.
#WATCH | Satya Niketan building collapse: Professor Rajni Abbi, Director of the University of Delhi South Campus, says, "It is not known how many children are inside. No one is able to ascertain the exact number. We have told all our colleges, and they are assessing how many… pic.twitter.com/r861HrRWQl
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 6, 2026Advertisement
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प्रोफ़ेसर रजनी अब्बी ने कहा, ‘यह पता नहीं है कि अंदर कितने बच्चे हैं. कोई भी सही संख्या का पता नहीं लगा पा रहा है. हमने अपने सभी कॉलेजों को बता दिया है और वे पता लगा रहे हैं कि यहां कितने छात्र रहते हैं. हम यहां रहने वाले सभी छात्रों को वापस कॉलेजों में बुला रहे हैं. मलबे के अंदर से एक कॉल भी आया था और अंदर से वीडियो कॉल भी हुआ है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि बच्चे सुरक्षित बाहर आ जाएं.’
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कब हुआ हादसा?
दिल्ली फायर ब्रिगेड ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी दोपहर 1:30 बजे मिली. अधिकारियों ने बताया कि दोपहर 1:50 बजे स्टेशन ऑफिसर (एसटीओ) नरेंद्र घटनास्थल पर पहुंचे और सूचना दी कि एक इमारत गिर गई है और कुछ लोग उसके नीचे फंसे हुए हैं. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग की. चश्मदीद ने बताया, जो इमारत गिरी है, उसका नाम 'हॉस्टल डेज़' है. ठीक उसके बगल में एक और इमारत है जो गिर गई. 'हॉस्टल डेज़' खास तौर पर लड़कों का PG है. यह पांच मंज़िला इमारत थी. बगल वाली इमारत भी गिर गई. जो छात्र अपने कमरों के अंदर थे, वे सभी मलबे के नीचे दब गए. फंसे हुए छात्रों की सही संख्या का पता रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड देखने के बाद ही चलेगा.
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